'जंतर मंतर-संसद भवन के पास भीड़...', US एंबेसी ने CJP प्रदर्शन से 3 दिन पहले ही अपने नागरिकों को कैसे कर दिया अलर्ट, हिंसा के तार कहां-कहां?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET परीक्षा मामला और शिक्षा मंत्री के धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर बीते सोमवार को जमकर प्रदर्शन हुआ। हजारों की संख्या में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदशर्नकारी संसद की तरफ पहुंचे।
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET परीक्षा मामला और शिक्षा मंत्री के धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर बीते सोमवार को जमकर प्रदर्शन हुआ। हजारों की संख्या में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदशर्नकारी संसद की तरफ पहुंचे। इसके अलावा किसानों ने भी दिल्ली की तरफ कूच किया। लेकिन इन सबके बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है और वो ये कि क्या इस प्रदर्शन के बारे में अमेरिका को पहले से पता था? ऐसा इसलिए क्योंकि प्रदर्शन से ठीक तीन दिन पहले अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों को इस प्रोटेस्ट से बचाने के लिए एडवाइजरी भी जारी की थी।
एडवाइजरी में CJP प्रोटेस्ट और किसानों का दिल्ली कूच को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। भारत में अमेरिकी दूतावास ने 17 जुलाई को एडवाइजरी जारी करते हुए कहा था कि 20 जुलाई, 2026 को जंतर-मंतर और संसद भवन के आसपास भारी भीड़ जमा होने की आशंका है। राजनेताओं और कार्यकर्ताओं का प्रोटेस्ट संसद के मानसून सत्र के दिन होगा और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होने के कारण कुछ रास्तें डायवर्ट हो सकते है। अमेरिकी दूतावास को पहले ही भनक होने के कारण अब सवाल उठने लगे है कि क्या इस प्रोटेस्ट में अमेरिका का कोई कनेक्शन है?
हालिया प्रदर्शनों का संदर्भ
दिल्ली में हाल के दिनों में कई प्रदर्शन हुए हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) जैसे समूह शिक्षा संबंधी मुद्दों पर प्रदर्शन कर रहे हैं, जिनमें परीक्षाओं में अनियमितता और संबंधित मंत्री की जिम्मेदारी तय कर इस्तीफा की मांग शामिल है। ये प्रदर्शन मानसून सत्र की शुरूआत के साथ ओवरलैप कर गए। किसानों की तिकड़ी भी "दिल्ली चलो" अंदाज में एकत्र हुई है — कुछ समूह प्रस्तावित भारत-यूएस व्यापार समझौते के विरोध में सीमाओं व किसान घाट पर जमा हुए हैं।
षड़यंत्र के दायरे पर सवाल
जहां तक अमेरिका की चेतावनी का सवाल है, अमेरिकी कूटनीतिक मिशनों द्वारा ऐसी अलर्ट जारी करना दुनिया भर में सामान्य प्रैक्टिस है। परन्तु इस सलाह की टाइमिंग और सदस्यता खासकर प्रदर्शन के आकार व स्वरूप को लेकर दी गई जानकारी भारत के विश्लेषकों में चिंता का विषय बनी हुई है। कुछ विशेषज्ञ बताते हैं कि दूतावास आमतौर पर खुले स्रोतों से जानकारी इकट्ठा करते हैं। स्थानीय समाचार, पुलिस घोषणाएं और सार्वजनिक कार्यक्रमों का शेड्यूल देखकर अपने नागरिकों को संभावित व्यवधानों से अवगत कराते हैं। इसके बावजूद आलोचक अमेरिका की भूमिका पर संदेह जता रहे हैं और यह पूछ रहे हैं कि क्या किसी तरह की पूर्व-योजना की गयी थी।
अलर्ट में प्रयुक्त कुछ शब्द और वाक्यांश — जैसे "बड़ी भीड़", "बड़े जमावड़े", "बड़े पैमाने पर", "यातायात में व्यापक व्यवधान" और "कड़े सुरक्षा उपाय" — ने विश्लेषकों के सवालों को और हवा दी है। इन शब्दों के आधार पर अमेरिका के प्रदर्शन से जुड़े होने का अनुमान लगाने वालों ने कई शंकाएं उठायीं। हालांकि, अलर्ट में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का कोई ज़िक्र नहीं है, फिर भी इस तरह की पूर्वज्ञानता ने आलोचकों की उत्सुकता बढ़ा दी है।
वर्तमान सबूतों की सामाजिक तस्वीर
इस समय ऐसे किसी भी प्रत्यक्ष प्रमाण का अभाव है जो दिखाए कि अमेरिका ने प्रदर्शन का आयोजन किया हो या प्रदर्शनकारियों के साथ "पैरेलल लाइनें" बनाई हों। कई विश्लेषक मानते हैं कि ये षड़यंत्र-संबंधी धारणा डर और उत्सुकता से उपजी बात है। विशेषज्ञ यह भी जोर देकर कहते हैं कि कूटनीतिक मिशन अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए संभावित व्यवधानों की पहले से तैयारी करते हैं और इसी संदर्भ में ऐसी चेतावनियां जारी की जाती हैं।
Published By : Ankur Shrivastava
पब्लिश्ड 21 July 2026 at 19:32 IST