'नक्सलवाद को 'लाइलाज बीमारी' मानकर छोड़ दिया...' PM मोदी ने कांग्रेस पर साधा निशाना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 से पहले की कांग्रेस सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने नक्सलवाद को 'लाइलाज बीमारी' मानकर छोड़ दिया था, जिससे देश का भारी नुकसान हुआ। उन्होंने बताया कि 2014 के बाद मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और ठोस रणनीति के कारण नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या में भारी गिरावट आई है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने देश में नक्सलवाद को एक ‘लाइलाज बीमारी’ मानकर इसे इसके हाल पर छोड़ दिया था। पीएम मोदी ने कहा कि 2004 से 2013 के बीच देश के दुश्मनों से निपटने के लिए आवश्यक राजनीतिक इच्छाशक्ति और सुनियोजित रणनीति का पूर्ण अभाव था।
2014 के बाद मजबूत हुई राजनीतिक इच्छाशक्ति
प्रधानमंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 2004 से 2013 के दौरान नक्सली हमलों में शहीद होने वाले सुरक्षाकर्मियों की संख्या मारे गए नक्सलियों से भी अधिक थी। उन्होंने कहा कि 2014 में देश की राजनीतिक इच्छाशक्ति मजबूत हुई। इसके बाद, लगभग 20 राज्यों के 230 से अधिक प्रभावित जिलों में चलाए गए निर्णायक अभियानों से नक्सली हिंसा पर लगाम लगी। पहले एक साल में 2,000 से अधिक हमले होते थे, लेकिन अब स्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं।
शहीदों के प्रति पूर्ववर्ती नेताओं की उदासीनता
पीएम मोदी ने दंतेवाड़ा में 2010 में हुए सीआरपीएफ के 76 जवानों और 44 नागरिकों के बलिदान को याद किया। उन्होंने कहा कि अकेले छत्तीसगढ़ में 1,000 से अधिक जवान शहीद हुए, लेकिन अपने महलों में रहने वाले तत्कालीन प्रभावशाली नेताओं की ओर से संवेदना का एक शब्द तक नहीं निकला। भारत ऐसी स्थिति को कभी स्वीकार नहीं कर सकता जहाँ दुश्मनों के हमलों का करारा जवाब न दिया जाए।
47 वर्षों में पहली बार CRPF का कोई जवान शहीद नहीं
नक्सल विरोधी अभियानों में मिली ऐतिहासिक सफलता का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि 47 वर्षों में यह पहली बार हुआ है जब पिछले एक साल में ड्यूटी के दौरान सीआरपीएफ के किसी भी जवान की जान नहीं गई। उन्होंने इस सफलता का श्रेय सीआरपीएफ, कोबरा, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी और राज्य पुलिस बलों के त्याग, साहस और संयम को दिया।
अबूझमाड़ और बस्तर में विकास का नया युग
पीएम मोदी ने बस्तर और अबूझमाड़ क्षेत्र में सुरक्षा बलों के साथ दिवाली मनाई। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के जनसेवा कार्यों से प्रभावित क्षेत्रों की जनता का विश्वास सरकार के प्रति बढ़ा है। दशकों पुरानी लड़ाई जीतने के बाद यह पहली ऐसी दिवाली है, जब देश का हर जिला नक्सली खौफ से मुक्त हुआ है और बस्तर विकास के एक नए युग में प्रवेश कर रहा है।
Published By : Aarya Pandey
पब्लिश्ड 8 November 2026 at 14:19 IST