CJP में पड़ी फूट, मनीष ब्रह्मभट्ट ने बनाई सीजेपी लोकतांत्रिक नाम से नई पार्टी, अभिजीत दीपके को बताया अरविंद केजरीवाल का पुतला
BREAKING: CJP में पड़ी फूट, मनीष ब्रह्मभट्ट ने बनाई सीजेपी लोकतांत्रिक नाम से नई पार्टी, अभिजीत दीपके को बताया अरविंद केजरीवाल का पुतला
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कॉकरोच जनता पार्टी के बाद अब इसी तरह की एक और पार्टी में चर्चा आ गई है। ‘CJP-डेमोक्रेटिक' नाम से नई पार्टी लॉन्च हुई है। नए गुट का दावा है कि इसमें वे सभी लोग शामिल हैं, जो सीजेपी से असहमत हैं और उससे अलग हो गए हैं। पार्टी नए वॉलंटियर्स को शामिल कर रही है।
आज यानी 3 सितंबर को सीजेपी-डी ने अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस की। सीजेपी-डी के मनीष ब्रह्मभट्ट ने कहा, "यह नया गुट सीजेपी से ही निकला है। हम जल्द ही अपना समर्थन दिखाने के लिए एक वॉलंटियर रैली आयोजित करेंगे।" नए गुट ने केजरीवाल पर सीजेपी आंदोलन हैक करने का आरोप लगाया है।
मनीष ब्रह्मभट्ट ने गुरुवार को दिल्ली में कहा कि छात्रों के आंदोलन के बाद इस पार्टी को बेंच दिया गया और राजनीतिकरण कर दिया गया। उन्होंने कहा कि युवाओं ने खून-पसीना बहाया, लेकिन उनसे पूछे बिना अरविंद केजरीवाल की राष्ट्रीय टीम बना दी गई। उन्होंने कहा कि CJPD केजरीवाल की टीम नहीं बनेगी।
मनीष ने कहा कि दिपके ने अपने घरों में आराम से बैठकर 12 सदस्यों की टीम बना ली और आंदोलन की सफलता के बाद, किसी भी वॉलंटियर से कोई राय नहीं ली गई। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया या इंस्टाग्राम से जुड़े लोगों से भी जरूरी शर्तों के बारे में नहीं पूछा गया, इसके बजाय, उन्होंने आम आदमी पार्टी से जुड़े 8 लोगों, एक महिला मित्र और कॉलेज के दोस्तों को शामिल करके टीम बना ली।
केजरीवाल CJP के बहाने अपना जनाधार मजबूत कर रहे हैं- मनीष
मनीष ने कहा कि वह चाहते थे कि राष्ट्रीय टीम में हर राज्य से 5 लोग होने चाहिए और उन क्षेत्रों से प्रदर्शनकारियों और वॉलंटियर्स को चुना जाए, लेकिन चयन प्रक्रिया हाई कमान के इशारे पर हुई।
उन्होंने दावा किया कि इस टीम को बनाने का विचार भी केजरीवाल का ही था ,क्योंकि वे अन्ना हजारे के समय से धोखेबाज रहे हैं। मनीष ने कहा कि CJP के बहाने केजरीवाल अपना जनाधार मजबूत कर रहे हैं।
मनीष ब्रह्मभट्ट ने क्या कहा
CJP-डेमोक्रेटिक के फाउंडर मनीष ब्रह्मभट्ट ने कहा, "आज हम 'कॉकरोच जनता पार्टी डेमोक्रेटिक' लॉन्च कर रहे हैं... हमें ऐसा क्यों करना पड़ा? यह आंदोलन देश का था; यह इसलिए सफल हुआ क्योंकि लोगों ने इसमें अपना खून-पसीना बहाया था। लेकिन, आंदोलन की सफलता के बाद इसे बेच दिया गया और इसका राजनीतिकरण कर दिया गया। अब यह 'टीम केजरीवाल' बन गई है क्योंकि अभिजीत दिपके और अन्य लोगों ने अपने घरों में आराम से बैठकर 12 सदस्यों की टीम बना ली।
आंदोलन की सफलता के बाद, किसी भी वॉलंटियर या प्रदर्शनकारी को न तो बुलाया गया और न ही उनसे राय ली गई। सोशल मीडिया या इंस्टाग्राम से जुड़े लोगों से भी ज़रूरी शर्तों के बारे में नहीं पूछा गया; इसके बजाय, उन्होंने आम आदमी पार्टी से जुड़े आठ लोगों, एक महिला मित्र और कॉलेज के दोस्तों को शामिल करके टीम बना ली। हम चाहते थे कि यह एक राष्ट्रीय टीम हो—जिसमें हर राज्य से पांच लोग हों और उन क्षेत्रों से प्रदर्शनकारियों और वॉलंटियर्स को चुना जाए।
हमने इच्छा जताई थी कि चयन प्रक्रिया 'हाई कमांड' या किसी मनमाने अधिकारी के इशारे पर न हो; लेकिन उन्होंने इस इच्छा को ठुकरा दिया और मनमाने ढंग से टीम बना ली। इस टीम को बनाने का विचार भी अरविंद केजरीवाल का ही था क्योंकि वे शुरू से ही धोखेबाज़ रहे हैं। जब अन्ना आंदोलन शुरू हुआ, तो उन्होंने अन्ना का फ़ायदा उठाया।"
Published By : Ankur Shrivastava
पब्लिश्ड 3 September 2026 at 16:54 IST