सड़कों पर CJP के प्रदर्शन में भारी हिंसा, संसद में विपक्ष का बवाल... मॉनसून सत्र के पहले दिन राजधानी दिल्ली में कोहराम, सरकार की क्या होगी रणनीति?
कॉकरोच जनता पार्टी के 'संसद मार्च' की वजह से सोमवार को दिल्ली में जबरदस्त बवाल देखने को मिला। वहीं, संसद के मॉनसून का पहला दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। अब सवाल है कि सरकार की आगे की रणनीति क्या होगी?
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सोमवार को देश की राजधानी दिल्ली में जमकर बवाल हुआ। सड़क से सदन तक मचे हंगामे की चर्चा आज पूरे देश में हो रही है। कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रदर्शनकारी और पुलिस के बीच उस समय हिंसक झड़प हो गई, जब वो संसद तक मार्च करने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस ने जब प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की तो प्रदर्शन और हिंसक और गया। प्रदर्शनकारियों के पत्थरबाजी में 50 से ज्यादा पुलिसकर्मियों घायल हो गए हैं। वहीं, पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अब तक 70 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। वहीं, संसद के मॉनसून का पहला दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। अब सवाल है कि सरकार की आगे की रणनीति क्या होगी?
कॉकरोच जनता पार्टी' शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर बीते कई दिनों से दिल्ली के जंतर-मतर पर बीते कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे थे। आज CJP ने आज संसद मार्च का आह्वान किया था। उनके साथ देने के लिए हजारों युवा भी जंतर-मजर पर पहुंच गए। संसद के मानसून सत्र को देखते हुए दिल्ली पुलिस से इसकी इजाजत नहीं दी थी।
CJP के हिंसक प्रदर्शन में कई पुलिसकर्मी घायल
CJP के प्रदर्शनकारी लगातार संसद की ओर बढ़ने की कोशिश करते नजर आए। पुलिस उन्हें बार-बार रूकने के लिए कह रही थी, मगर प्रदर्शनकारी ने पुलिस की एक ना सुनी। हालात को संभालने के लिए पुलिस को हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा। पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी दागे। इसके बाद भगदड़ जैसे हालात हो गए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर हमला बोल दिया। झड़प में दिल्ली पुलिस के कई जवान घायल हो गए।
छात्रों के प्रदर्शन पर हेमा मालिनी ने क्या कहा?
छात्रों के प्रदर्शन पर अलग-अलग दलों के नेताओं की प्रतिक्रिया भी आई। BJP सांसद हेमा मालिनी ने कहा, "अगर कोई दिक्कत है तो उसपर अच्छी तरह से चर्चा करनी चाहिए। ऐसे प्रदर्शन करने से कुछ काम नहीं होगा...देश के युवाओं और शिक्षा व्यवस्था के लिए मोदी सरकार ने बहुत काम किया है...बात करके इसको हल करना चाहिए...राम मंदिर के मामले में भी जिन लोगों ने गलत काम किया है, उनको सजा जरूर मिलेगी। हमारी सरकार न्याय करेगी।"
संसद क पहला दिन हंगामे की भेंट चढ़ा
वहीं, संसद में विपक्ष के भारी हंगामे की वजह से कार्यवाही चार पर स्थगित करनी पड़ी। संसद में आज पूरे दिन कोई काम नहीं हुआ, आखिरकार स्पीकर ने कार्यवाहीं मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया। विपक्षी सांसदों के हंगामे पर मनोज तिवारी ने कहा, "लोकसभा अध्यक्ष ने बहुत अच्छी बात कही की ऐसा क्यों बना दिया गया है कि संसद के पहले दिन सत्र नहीं चलेगा। ऐसा क्यों? लेकिन विपक्ष का नकारात्मक रवैया रहा। "
"जिन-जिन विषयों पर ये लोग तख्ती दिखा रहे हैं। उन सभी विषयों पर लोकसभा अध्यक्ष और सरकार बोल रही है कि हम चर्चा के लिए तैयार हैं। मगर चर्चा मांगने के बाद चर्चा नहीं करना और देश के लोगों को भ्रमित करना, इसी का परिणाम है कि हर राज्य में ये लोग चुनाव हार रहे हैं। इस सत्र में आशा करते हैं कि आगे संसद चलेगी।"
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने क्या कहा?
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा, "आज राहुल गांधी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई। लगातार हम आंदोलन कर रहे हैं। सरकार से जवाबदेही मांग रहे हैं कि देश की जो शिक्षा प्रणाली चौपट हो गई है उसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है? शिक्षा मंत्री का इस्तीफा कराए और एक विस्तृत चर्चा हो कि ये व्यवस्था कैसे बदले? सरकार कोई जवाब नहीं दे रही है। हमने आज जब आवाज उठानी चाही तो बार-बार सदन को स्थगित किया गया।"
जेपी नड्डा ने CJP प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की
इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने CJP प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इसकी जानकारी देते हुए उन्होंने X पोस्ट में लिखा, "आज पहली बार प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार के साथ बातचीत का प्रस्ताव आया और सुबह 11:50 बजे से हमारी बातचीत चल रही है। बैठक अच्छे माहौल में हुई। उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ शुरुआती बातचीत विस्तार से हुई और शाम करीब 4 बजे उन्होंने मुझे एक लिखित ज्ञापन सौंपा। मैंने सभी प्रदर्शनकारियों से अपना धरना खत्म करने और हालात सामान्य करने में प्रशासन की मदद करने का आग्रह किया है।"
सरकार की क्या होगी रणनीति?
मॉनसून सत्र के पहले दिन दोनों सदनों की कार्यवाही विपक्ष के हंगामे के कारण कई बार स्थगित करनी पड़ी। तो दिल्ली के बड़े हिस्से में CJP के प्रदर्शन की वजह से यातायात प्रभावित रहा और सुरक्षा के मद्देनजर कई मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए थे। इधर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक ने कहा कि जब तक युवा प्रतिनिधियों को संसद में सांसदों से मिलने की अनुमति नहीं मिलती या सांसद स्वयं अस्पताल में उनसे मिलने नहीं आते, तब तक वह अनशन जारी रखेंगे। अब देखने होगा कि सरकार की आगे रणनीति क्या होती? क्या कल भी सदन से लेकर सड़क तक ये हंगामा जारी रहेगा, या इसका समाधान निकाल लिया जाएगा?
Published By : Rupam Kumari
पब्लिश्ड 21 July 2026 at 00:05 IST