रेलवे के नए कवच के लिए केंद्र सरकार ने किए 252 करोड़ रुपए मंजूर, यात्रा होगी सुरक्षित, दुर्घटनाओं से होगा बचाव, बदलेगी भारतीय रेल की तस्वीर

मोदी सरकार भारतीय रेल की दुर्घटना को रोकने के लिए लगातार पिछले कुछ वर्षों ने कई ठोस कदम उठा रही है। अब भारतीय रेलवे ने नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे के लखनऊ डिवीज़न में 607.7 रूट किलोमीटर पर ₹252 करोड़ की कुल लागत से 'कवच वर्ज़न 4.0' लगाने को मंज़ूरी दी है।

 
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PM Modi Indian Railway Kavach | Image: Republic

मोदी सरकार भारतीय रेल की दुर्घटना को रोकने के लिए लगातार पिछले कुछ वर्षों ने कई ठोस कदम उठा रही है। इनमें सबसे बड़ा कदम भारतीय रेलवे को कवच टेक्नोलॉजी प्रदान कर सुरक्षित बनाने का किया जा रहा है। अब भारतीय रेलवे ने नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे के लखनऊ डिवीज़न में 607.7 रूट किलोमीटर पर ₹252 करोड़ की कुल लागत से 'कवच वर्ज़न 4.0' लगाने को मंज़ूरी दी है। 

इस प्रोजेक्ट में डिवीज़न के बचे हुए हिस्सों की भी पहचान कर उन्हें ‘कवच 4.0’ की सुरक्षा प्रदान की जाएगी। इससे ट्रेन संचालन के लिए सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर और मज़बूत होगा। 

क्या है कवच टेक्नोलॉजी 

‘कवच’ एक पूरी तरह से स्वदेशी टेक्नोलॉजी है जो रेल यात्रा को सुरक्षित बनाने के उदेश्य से बनाई गई है। यह एक ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) सिस्टम है, जिसे ऑपरेशनल सुरक्षा बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह 'सिग्नल पासिंग एट डेंजर' (SPAD) को रोकने में मदद करता है, ज़रूरत पड़ने पर अपने-आप ब्रेक लगाता है और ट्रेन संचालन की निगरानी करके सुरक्षित ट्रेन मूवमेंट में सहायता करता है।

यह पहल भारतीय रेलवे द्वारा अपने नेटवर्क पर 'कवच' लगाने के चल रहे काम का हिस्सा है, जिसका मकसद ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम को आधुनिक बनाना और रेलवे संचालन की सुरक्षा व विश्वसनीयता को बढ़ाना है।

कैसे काम करती है ये तकनीक 

कवच लोको पायलट को निर्धारित गति सीमा के भीतर ट्रेन चलाने में सहायता करता है। लोको पायलट के ऐसा करने में विफल रहने पर स्वचालित रूप से ब्रेक लगाकर, और खराब मौसम के दौरान ट्रेनों को सुरक्षित रूप से चलाने में भी मदद करता है। 

इसको ऐसे समझिए कि अगर 2 ट्रेन एक ही पटरी पर आमने-सामने आ रही हैं या एक दूसरे के पीछे आ रही है तो कवच से लेस ट्रेन होने वाले बड़े हादसे को रोक देगा और ट्रेनों की टक्कर नहीं होगी।  

कवच का यात्री ट्रेनों पर पहला फील्ड परीक्षण फरवरी 2016 में शुरू किया गया था। 2018-19 में कवच संस्करण 3.2 की आपूर्ति के लिए तीन फर्मों को मंजूरी दी गई थी। लेकिन कवच को जुलाई 2020 में राष्ट्रीय ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम के रूप में अपनाया गया था।

दिखा जबरदस्त सुधार

रेल मंत्रालय ने बताया कि कवच से भारतीय रेल में हादसों में व्यापक स्तर पर कटौती हुई है। सन 2014-15 में ट्रेन दुर्घटना 135 से घटकर 2025-26 में 16 रह गई। 

पूरे रेल नेटवर्क में कब तक लगेगा कवच 

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 'कवच' को लेकर कहा था कि इस पर बहुत तेजी से काम हो रहा है। रेलवे का नेटवर्क बहुत बड़ा और अलग-अलग तरह का है। कवच का 3.2 वर्जन 1,600 किलोमीटर के ट्रैक पर लगाया गया था तो इससे बहुत जानकारी मिली थी। 

रेल मंत्री ने बताया कि जुलाई 2024 में वर्जन 4 को मंजूरी मिली। यह वर्जन 4 सभी तरह की स्थितियों को ध्यान में रखता है। अब तक 10,000 लोकोमोटिव (इंजन) पर कवच का 4 वर्जन लगाने का ऑर्डर दिया जा चुका है और कवच लगाने के लिए लगभग 9,000 टेक्नीशियन और इंजीनियरों को ट्रेनिंग दी गई है। 

अश्विनी वैष्णव ने कहा “आम तौर पर, दुनिया भर में ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन नेटवर्क लगाने में 20 साल का समय लगा है। हमारा लक्ष्य अगले छह-सात सालों में कवच को पूरे रेल नेटवर्क में लगाने का है”। 

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Published By : Kritarth Sardana

पब्लिश्ड 19 September 2026 at 19:20 IST