अपडेटेड 13 January 2026 at 23:49 IST

BRICS Summit 2026: दुनिया के 40% GDP पर कब्जा... ट्रंप टैरिफ और दुनिया में बढ़ते तनाव के बीच BRICS की अध्यक्षता भारत के लिए क्यों अहम?

BRICS Summit 2026: भारत इस साल यानी 2026 में ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करेगा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इसका आधिकारिक वेबसाइट और नमस्ते वाला नया लोगो लॉन्च किया। 11 देशों का यह समूह दुनिया की 40% जीडीपी पर नियंत्रण रखता है।

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ट्रंप टैरिफ और दुनिया में बढ़ते तनाव के बीच BRICS की अध्यक्षता भारत के लिए क्यों अहम? | Image: Social media

BRICS Summit 2026: दुनिया के नक्शे पर भारत अब अपनी महाशक्ति वाली छवि और मजबूत करने जा रहा है। एक ओर डोनाल्ड ट्रंप की ‘टैरिफ गन’ की चुनौती सामने है, तो वहीं दिल्ली ने अपनी सधी हुई कूटनीति और ‘नमस्ते’ की ताकत से एक अभेद्य चक्रव्यूह तैयार कर लिया है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार 13 जनवरी को ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन 2026 के लिए नमस्ते वाला नया लोगो लॉन्च कर दिया है। भारत की मेजबानी में होने वाला यह शिखर सम्मलेन ग्लोबल साउथ की सबसे बड़ी आवाज होगी, जहां 11 देशों का समूह शामिल होगा। ट्रंप टैरिफ और दुनिया में बढ़ते तनाव के बीच BRICS की अध्यक्षता भारत के लिए बेहद अहम होने वाला है, क्योंकि ब्रिक्स का दुनिया के 40% GDP पर कब्जा है।

ब्रिक्‍स के पास दुनिया का 40% व्यापार

भारत ने साल 2026 के लिए ब्रिक्स (BRICS) की कमान संभाल ली है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इसका आधिकारिक वेबसाइट और नमस्ते वाला नया लोगो लॉन्च कर दिया है। यह सम्मेलन भारत के लिए इसलिए भी खास है,क्योंकि ब्रिक्स अपनी स्थापना की 20वीं वर्षगांठ भी मनाएगा। इस सम्मेलन में वैश्विक कल्याण, आर्थिक लचीलापन और नवाचार पर सबसे अधिक फोकस होने वाला है। 11 सदस्यों वाला यह समूह अब दुनिया की 40% जीडीपी का प्रतिनिधित्व कर रहा है।

BRICS की अध्यक्षता भारत के लिए क्यों अहम?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन की टैरिफ नीतियों और वैश्विक तनावों के बीच भारत के लिए BRICS की अध्यक्षता कई कारणों से महत्वपूर्ण है। भारत के पास यह अध्यक्षता ऐसे समय में आई है जब ट्रंप ने विभिन्न देशों पर भारी टैरिफ लगाए हैं। ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25% टैरिफ, भारत पर रूसी कच्चे तेल की खरीद के कारण 50% टैरिफ। ऐसे में 11 सदस्यों वाला ब्रिक्स (BRICS) ट्रंप के खिलाफ एकजुट होकर कोई बड़ा निर्णय भी ले सकता है। इस समूह में भारत अहम भूमिका निभा सकता है।

ग्लोबल साउथ की आवाज बनना

ब्रिक्स (BRICS) 20 साल पुराना हो चुका है। जिस तरह से इसका विस्तार हो रहा है उससे और भी मजबूत बनाता जा रहा है। भारत की अध्यक्षता होना इसलिए भी खास है, क्योंकि यहां विकासशील देशों के मुद्दों जैसे जलवायु परिवर्तन, डिजिटल अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर अधिक फोकस होने वाला है। यह सम्मेलन ट्रंप की अलगाववादी नीतियों के खिलाफ एकजुटता का प्रतीक बनेगा।

बहुपक्षीयता और वैश्विक सुधारों का नेतृत्व

विश्व स्तर पर लगातार तनाव बढ़ रहा है। बढ़ते तनावों में भारत BRICS प्लेटफॉर्म का उपयोग करके विश्व व्यापार संगठन (WTO) और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) जैसे संस्थानों में सुधारों की वकालत कर सकता है। सम्मेलन ग्लोबल साउथ के हितों को मजबूत करेगा और अमेरिका-केंद्रित व्यवस्था के खिलाफ एकजुटता भी बढ़ाएगा। भारत की प्राथमिकताएं बहुपक्षीय सहयोग, समावेशी विकास पर भी केंद्रित हो सकता है। भू-राजनीतिक संतुलन के लिए भी ब्रिक्स का मंच ब्रिक्स देशों के लिए अहम भूमिका निभा सकता है।

BRICS क्या है और इस समूह में कितने देश शामिल है?

ब्रिक्स (BRICS) उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है, जिसका उद्देश्य आर्थिक और राजनीतिक सहयोग बढ़ाना है। ब्रिक्स वैश्विक आबादी और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का एक बड़ा हिस्सा प्रतिनिधित्व करता है। ब्रिक्स अंतरराष्ट्रीय संस्थानों जैसे संयुक्त राष्ट्र (UN), विश्व बैंक (IMF) और विश्व व्यापार संगठन (WTO) में सुधार लाने का लक्ष्य रखता है। इस समूह में कुल 11 देश शामिल है। ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका मूल सदस्य है वहीं, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), और इंडोनेशिया नए सदस्य है। 

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Published By : Sujeet Kumar

पब्लिश्ड 13 January 2026 at 22:00 IST