BRICS Summit 2026: नई दिल्ली में जुटे दो दर्जन देश, भारत को क्या-क्या हासिल हुआ? जानें सम्मेलन के 5 सबसे बड़े फैसले
BRICS Summit 2026: नई दिल्ली में आयोजित 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 13 सितंबर को समाप्त हो चुका है। इस सम्मेलन में दुनिया के लगभग दो दर्जन से अधिक राष्ट्राध्यक्षों ने हिस्सा लिया। ब्रिक्स में आतंकी हमले से लेकर साउथ ग्लोबल को मजबूत करने की बात सामने उभर कर आई।
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BRICS Summit 2026: नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आज यानी 13 सितंबर को समापन हो चुका है। इस वैश्विक आयोजन में भारत की कूटनीतिक का 'मैराथन' देखने को मिला, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन 3 दिनों में दुनिया के 15 राष्ट्राध्यक्षों संग द्विपक्षीय वार्ता की।
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में 40% से अधिक जीडीपी की हिस्सेदारी, 11 देश, 12 सहयोगी देश और करीब UN समेत 5 इंटरनेशनल संस्थान ने दिल्ली के भारत मंडपम में जो फैसला लिए वो ब्रिक्स सदस्य देशों के भविष्य के लिए एक बड़े रोडमैप तैयार करने जैसा रहा। ब्रिक्स समाप्त होने के बाद यह सवाल आता है कि इस सम्मेलन के 5 बड़े फैसले क्या-क्या रहे और ब्रिक्स से भारत को क्या-क्या मिला? 3 दिन के मंथन के बाद जो दिल्ली घोषणापत्र जारी हुआ उसमें 5 बड़ी कुछ इस प्रकार हैं।
आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सबसे बड़े फैसले की बात की जाए तो सबसे पहले आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस और पहलगाम हमले की निंदा रही। ब्रिक्स के मंच से ब्रिक्स देशों द्वारा सर्वसम्मति से बिना किसी दोहरे रवैये के आतंकवाद के हर रूप की कड़ी निंदा की गई।
सम्मेलन में क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म, टेरर फंडिंग और सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने पर पूर्ण सहमति बनी। वहीं, अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई और आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' (बिल्कुल बर्दाश्त न करने) की नीति अपनाने का आह्वान किया गया।
ब्रिक्स मंच से एकतरफा टैरिफ और प्रतिबंधों का विरोध
ब्रिक्स समूह ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) में सुधार के लिए अपना समर्थन दोहराया और एक खुले, न्यायसंगत, पारदर्शी, निष्पक्ष, समावेशी और नियमों पर आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली की मांग की। साथ ही, उन्होंने WTO के विवाद निपटान तंत्र को पूरी तरह से और तुरंत बहाल करने की वकालत की।
घोषणापत्र में एकतरफा आर्थिक और सेकेंडरी प्रतिबंधों की भी निंदा की गई और कहा गया कि ये अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हैं। इसमें तर्क दिया गया कि ऐसे उपायों का विकास, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा पर बुरा असर पड़ता है।
ग्लोबल वैल्यू चेन पर ब्रिक्स सदस्य देशों ने जताई चिंता
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ग्लोबल वैल्यू चेन 2026 से 2030 के तहत बाजारों को एक दूसरे के लिए खोलने और सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। मंच से जंग के बीच कमर्शियल शिपिंग रूट्स को लेकर शांतिपूर्ण बातचीत से सुलझाने की बात कही गई। पश्चिमी देशों द्वारा एकतरफा टैरिफ लगाने को लेकर भी चिंता जताई गई।
ग्लोबल साउथ की आवाज और वैश्विक सुधार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ग्लोबल साउथ को और अधिक मजबूत करने की वकालत की। पीएम मोदी द्वारा रखे गए विचारों के अनुरूप, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) सहित बहुपक्षीय संस्थानों में संरचनात्मक सुधार और 'ग्लोबल साउथ' की मजबूत भागीदारी की वकालत की गई।
इसके अलावा, पांचवा मध्य-पूर्व और क्षेत्रीय संकट पर ब्रिक्स द्वारा चिंता जाहीर की गई। वहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सुरक्षित, समावेशी और पारदर्शी इस्तेमाल के लिए ग्लोबल गवर्नेंस फ्रेमवर्क बनाने का भी फैसला हुआ।
Published By : Sahitya Maurya
पब्लिश्ड 13 September 2026 at 23:00 IST