Bihar: नीतीश कुमार 30 मार्च को देंगे मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा? जानिए क्या कहता है नियम, क्यों हो रही चर्चा
Nitish Kumar: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 30 मार्च को MLC पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इसके बाद वो राज्यसभा के सदस्य की शपथ लेंगे।
Nitish Kumar Resigns: बिहार की राजनीति में 15 दिनों में बड़ा उलट फेर देखने को मिल सकता है। सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 30 मार्च यानी सोमवार को विधानमंडल से इस्तीफा दे सकते हैं। यानी वह बिहार विधान परिषद् की सदस्यता (MLC) से इस्तीफा देकर राज्य में नई सरकार बनाने की ओर एक और कदम आगे बढ़ाएंगे।
अटकलें हैं कि सोमवार, 30 मार्च को वह परिषद की सदस्यता छोड़ने के साथ ही मुख्यमंत्री पद से भी इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बता दें, नीतीश कुमार हाल में राज्यसभा सदस्य के लिए निर्वाचित हुए हैं, जिसके बाद उनका मुख्यमंत्री पद छोड़ना तय माना जा रहा है।
30 मार्च ही क्यों?
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत यह नियम है कि किसी भी व्यक्ति को एक साथ दो सदनों की सदस्यता नहीं दी जाती। राज्यसभा के लिए चुने जाने के 14 दिनों के भीतर एक पद छोड़ना जरूरी है और नीतीश कुमार के लिए यह समय सीमा 30 मार्च तक है। ऐसे में CM नीतीश को संवैधानिक प्रक्रिया के अंतर्गत 30 मार्च तक इस्तीफा देना होगा।
बता दें, शुक्रवार-शनिवार और रविवार को विधान परिषद कार्यालय बंद रहेगा। इस कारण सभापति के कार्यालय में अब सोमवार को ही इस्तीफा सौंपा जा सकेगा।
राज्यसभा का कार्यकाल 10 अप्रैल से शुरू
बता दें, राज्यसभा कार्यकाल 10 अप्रैल से शुरू होगा और नीतीश कुमार के राज्यसभा सांसद के रूप में 12 या 13 अप्रैल 2026 को शपथ लेने की संभावना है। कुछ सूत्रों का कहना है कि वे 10 अप्रैल के बाद कभी भी शपथ ले सकते हैं क्योंकि मौजूदा राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है।
इसके बाद चर्चा है कि नीतीश कुमार 14 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं, जिसके बाद बिहार में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। हालांकि मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई बाध्यता नहीं है। वे चाहें तो कुछ समय तक पद पर बने रह सकते हैं।
नीतीश कुमार का सियासी सफर
बता दें, नीतीश कुमार का सियासी करियर काफी लंबा है। उन्होंने पहली बार 1985 में नालंदा जिले के हरनौत सीट से विधायक के लिए चुने गए थे। इसके बाद राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हुए। वह पहली बार बाढ़ लोकसभा सीट से सांसद बने और फिर नालंदा सीट से कई बार सांसद चुने गए।
वह केंद्रीय रेल मंत्री समेत कई अहम पदों पर रहे और 2005 में बिहार के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद से ही वे राज्य की राजनीति के केंद्र में रहे हैं।
Published By : Shashank Kumar
पब्लिश्ड 27 March 2026 at 16:35 IST