'अदृश्य महामारी' से जंग: बिहार विधानसभा में बच्चों की रील्स-गेम लत पर चर्चा, नीतीश सरकार ने ठोस नीति बनाने का किया ऐलान

Bihar Assembly: बिहार विधानसभा में जेडीयू विधायक समृद्ध वर्मा ने बच्चों में मोबाइल फोन और ऑनलाइन गेम के मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि यह एक अदृश्य महामारी है, जो बिहार के भविष्य की जड़ों को कमजोर कर रही है।

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विधानसभा में बच्चों की मोबाइल लत का उठाय मुद्दा | Image: Freepik, ANI

Bihar news: बच्चों में मोबाइल फोन की बढ़ती लत को लेकर बिहार की नीतीश सरकार गंभीर है। सरकार ने बच्चों और किशोरों के स्क्रीन टाइम को कंट्रोल करने के लिए नई पॉलिसी लाने की बात कही है। सोमवार (23 फरवरी) को विधानसभा में बच्चों के रील्स देखने और ऑनलाइन गेम खेलने की आदत पर चर्चा हुई। इस पर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि सरकार इस विषय पर व्यापक और ठोस नीति बनाने की दिशा में काम कर रही है।

विधायक ने उठाई ये मांग

बिहार विधानसभा में इस मुद्दे को पश्चिम चंपारण के सिकटा से जनता दल यूनाइटेड के विधायक समृद्ध वर्मा ने उठाया और उन्होंने इसे 'अदृश्य महामारी' बताया। उन्होंने सरकार से मांग की कि विभिन्न आयु वर्ग के लिए स्क्रीन टाइम सीमा तय किया जाए।

विधायक समृद्ध वर्मा ने कहा कि गांवों में बच्चे घंटों मोबाइल पर बिता रहे हैं। वे यूट्यूब और सोशल मीडिया देखते रहते हैं। बच्चों में ऑनलाइन गेम्स की लत बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर इस पर अभी कदम नहीं उठाए गए, तो इसका असर बच्चों की पढ़ाई, व्यवहार और भविष्य पर पड़ेगा।

‘बिहार के भविष्य की जड़ों को कमजोर…’

जदयू विधायक समृद्ध वर्मा ने कहा कि यह एक अदृश्य महामारी है, जो बिहार के भविष्य की जड़ों को कमजोर कर रही है। खिलौने और किताबों की जगह अब लंबे समय तक स्क्रीन पर स्क्रॉलिंग ले चुके है। मोबाइल पर रील्स देखने से डोपामाइन हार्मोन का प्रभाव बढ़ता है, जिससे बच्चों की एकाग्रता कमजोर होती है।

उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब सरकार करोड़ों बच्चों को AI सिखाने की योजना बना रही है, तब डिजिटल लत से बचाव का सुरक्षा चक्र भी जरूरी है। विधायक ने विधानसभा में राज्य सरकार से सभी सरकारी स्कूलों में 'डिजिटल हाइजीन' को अनिवार्य पाठ के तौर पर शामिल करने की भी मांग की। साथ ही, हर जिला अस्पताल में 'लत परामर्श केंद्र' (एडिक्शन काउंसिलिंग सेंटर) स्थापित करने और ग्रामीण माताओं को 'स्क्रीन टाइम प्रबंधन' के बारे में जागरूक करने के लिए जीविका दीदी नेटवर्क का इस्तेमाल करने का भी सुझाव दिया।

वहीं, इस मुद्दे पर राज्य की आईटी मंत्री श्रेयसी सिंह ने भी कहा कि यह विषय बेहद गंभीर है। भारत सरकार ने कई गाइडलाइन जारी की हैं। बिहार भी बहुविभागीय दृष्टिकोण अपनाएगा।

सम्राट चौधरी ने क्या कहा? 

डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार ने इस संबंध में बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (NIMHANS) से रिपोर्ट मांगी है। यह बहु-क्षेत्रीय विषय है, जिसमें कई हितधारक शामिल हैं। रिपोर्ट मिलने पर सभी संबंधित पक्षों की बैठक बुलाई जाएगी और इस संबंध में नीति तैयार की जाएगी।

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Published By : Ruchi Mehra

पब्लिश्ड 24 February 2026 at 12:22 IST