BIG BREAKING: हिंदू पक्ष की बड़ी जीत, मस्जिद नहीं मंदिर है धार का भोजशाला, हिंदुओं को पूजा का पूरा अधिकार; कोर्ट ने सुनाया फैसला
हिंदू पक्ष की बड़ी जीत, मस्जिद नहीं मंदिर है धार का भोजशाला, हिंदुओं को पूजा का पूरा अधिकार; कोर्ट ने सुनाया फैसला
भोजशाला मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए परिसर को मां वाग्देवी के मंदिर के रूप में मान्यता दी है। फैसले के बाद धार जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए हाई अलर्ट पर हैं। इससे पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने कोर्ट में 2100 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट पेश की थी। कोर्ट ने रिपोर्ट के तथ्यों को महत्वपूर्ण माना, जबकि मुस्लिम पक्ष ने इसे गलत बताया था। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया।
कोर्ट ने यह भी कहा कि मस्जिद पक्ष यदि सरकार को आवेदन देता है तो उसे अलग जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार इंग्लैंड से वाग्देवी की प्रतिमा लाने का प्रयास करे। कोर्ट ने अंतरसिंह की याचिका खारिज कर दी, जिन्होंने कोर्ट से मांग की थी कि दोनों पक्षों में सौहार्द बना रहे, इस तरह की व्यवस्था का आदेश दिया जाए। मंदिर पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने इस फैसले के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हिंदुओं को पूजा का अधिकार मिला।
कोर्ट के फैसले की अहम बातें
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ऐतिहासिक साहित्य और साक्ष्य यह साबित करते हैं कि इस विवादित क्षेत्र का मूल चरित्र 'भोजशाला' के रूप में था, जो राजा भोज के समय संस्कृत सीखने का केंद्र था। बेंच ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि इस स्थान पर हिंदू पूजा की निरंतरता कभी खत्म नहीं हुई थी।
यानी वहां सदियों से पूजा की परंपरा जारी रही है। कोर्ट ने कहा कि हर सरकार का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह न केवल प्राचीन स्मारकों, बल्कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के मंदिरों और उनके गर्भगृह (Sanctum Sanctorum) की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करे। अदालत ने आदेश दिया है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इस संपत्ति के संरक्षण और सुरक्षा का काम जारी रखेगा।
क्या है भोजशाला विवाद?
भोजशाला मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित एक प्राचीन स्मारक है। इसे लेकर सालों से विवाद चला आ रहा है। हिंदू पक्ष का मानना है कि यह वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर और एक संस्कृत पाठशाला है। जबकि मुस्लिम पक्ष इसे 'कमाल मौला मस्जिद' कहता है। अब तक की व्यवस्था के अनुसार, हिंदू समुदाय के लोग मंगलवार को वहां पूजा करते थे और मुस्लिम समुदाय के लोग शुक्रवार को वहां नमाज अदा करते थे।
क्या है भोजशाला का इतिहास
इतिहास की बात करें तो हजार साल पहले धार में परमार वंश का शासन था। यहां पर 1000 से 1055 ईस्वी तक राजा भोज ने शासन किया। राजा भोज सरस्वती देवी के अनन्य भक्त थे। उन्होंने 1034 ईस्वी में यहां पर एक महाविद्यालय की स्थापना की, जिसे बाद में 'भोजशाला' के नाम से जाना जाने लगा। इसे हिंदू सरस्वती मंदिर भी मानते थे।
ऐसा कहा जाता है कि 1305 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी ने भोजशाला को ध्वस्त कर दिया। बाद में 1401 ईस्वी में दिलावर खान गौरी ने भोजशाला के एक हिस्से में मस्जिद बनवा दी। 1514 ईस्वी में महमूद शाह खिलजी ने दूसरे हिस्से में भी मस्जिद बनवा दी। 1875 में यहां पर खुदाई की गई थी। इस खुदाई में सरस्वती देवी की एक प्रतिमा निकली थी।
Published By : Ankur Shrivastava
पब्लिश्ड 15 May 2026 at 14:59 IST