'नककटु और चंडालन भईया को सईया बनाने वाले...', स्वरा भास्कर के बयान पर भड़के बाबा बागेश्वर , कहा - तुम क्या जानों जौहर...

स्वरा भास्कर के रानी पद्मावती और जौहर पर दिए गए बयान को लेकर बागेश्वर बाबा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्वरा का नाम लिए बिना उन्हें 'तथाकथित महिला' और धर्म विरोधी करार दिया है।

 
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स्वरा भास्कर के रानी पद्मावती और जौहर पर दिए गए बयानों के बाद बागेश्वर बाबा यानी धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने उन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्वरा भास्कर को आड़े हाथों लेते हुए एक तीखी टिप्पणी की है, जो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रही है। बाबा ने कहा कि एक तथाकथित महिला ने हमारी संस्कृति और इतिहास पर सवाल उठाए हैं, जिसे देश कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।

बाबा ने आगे कहा कि जौहर को कायरता बताने वाले लोग हमारी महान संस्कृति और बलिदान के इतिहास से पूरी तरह अनजान हैं। उनके अनुसार, जौहर किसी भी रूप में कायरता नहीं, बल्कि भारतीय नारियों का अदम्य साहस, उच्च कोटि का समर्पण और अपने धर्म व प्राणों की रक्षा के लिए किया गया एक ऐतिहासिक त्याग है। उन्होंने अपनी बात को और कड़े शब्दों में रखते हुए कहा कि ऐसे लोग जो अपनी मर्यादा और संस्कृति से परे हैं, वे इस महान बलिदान के मर्म को कभी नहीं समझ सकते।

स्वरा भास्कर का रानी पद्मावती के जौहर को लेकर विवादित टिप्पणी

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने इतिहास में रानी पद्मावती और राजपूत महिलाओं द्वारा किए जाने वाले 'जौहर' को लेकर एक विवादित टिप्पणी की थी। उन्होंने जौहर को 'कायरता' करार दिया था। इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने खुले मंच से तीखी आपत्ति जताई।

बागेश्वर बाबा का तीखा पलटवार

बागेश्वर बाबा ने स्वरा भास्कर के बयान पर कड़ा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि एक तथाकथित महिला ने रानी पद्मावती और जौहर पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने गुस्से में कहा, अरे नककटु चंडालिन, यह कायरता नहीं, जौहर तो वीरता है, समर्पण है। अपने पति के प्रति वह अर्पण है। भईया को सईया बनाने वाले तुम क्या जानो जौहर को, तुम क्या जानो संस्कृति को, तुम क्या जानो मर्यादा को।'बाबा ने आगे कहा कि धर्म विरोधी लोग भारतीय संस्कृति की इस महान परंपरा को कभी नहीं समझ सकते हैं।

संस्कृति और मर्यादा पर प्रहार

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि भारत में कुछ ऐसे लोग भी मौजूद हैं जो अपनी वैचारिक प्राथमिकताओं के कारण परंपराओं का उपहास उड़ाते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग अपनी संस्कृति से दूर हैं और केवल विरोध के लिए विरोध करते हैं, वे सनातन मूल्यों और बलिदान के इतिहास को नहीं जान सकते। जौहर केवल एक प्रथा नहीं, बल्कि आक्रांताओं के सामने अपने सम्मान और शील की रक्षा के लिए किया गया सर्वोच्च बलिदान था।

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Published By : Aarya Pandey

पब्लिश्ड 6 September 2026 at 12:51 IST