पहले करारी हार, फिर पार्टी छीनी, सिंबल छीना... विधानसभा चुनाव में 'खेला होबे' नारे से आगाज करने वाली ममता बनर्जी का बंगाल में कैसे हो गया 'खेला'?
नंदीग्राम उपचुनाव से पहले पूर्व सीएम ममता बनर्जी को झटके पर झटका लग रहा है। कभी विधानसभा चुनाव में 'खेला होबे' नारे से आगाज कर BJP को चुनौती देने वाली ममता बनर्जी के साथ बंगाल में कैसे 'खेला' हो गया, आईए इसे समझने की कोशिश करते हैं।
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पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम और सियासी दिग्गज मानी जानीं वाली ममता बनर्जी के साथ बड़ा ‘खेला’ हो गया। नंदीग्राम उपचुनाव से पहले एक ही दिन ममता को एक के बाद एक तीन बड़े झटके लगे। पहले पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज होना। फिर नंदीग्राम की उम्मीदवार का ममता साथ छोड़ना और तीसरा जिसे उन्होंने समर्थन देने का ऐलान किया उसकी गिरफ्तारी। इन घटनाओं ने बंगाल की सियासत को नया मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया। कभी विधानसभा चुनाव में 'खेला होबे' नारे से आगाज करने वाली ममता बनर्जी के साथ बंगाल में कैसे 'खेला' हो गया, आईए इसे समझने की कोशिश करते हैं।
चुनाव आयोग ने राज्य की दो सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस का नाम और घास के साथ जोराफुल का चुनाव चिह्न फ्रीज कर दिया। दोनों गुटों के लिए नए नाम और चिह्न तय कर दिए गए हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले समूह को अब ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ के नाम से जाना जाएगा और उन्हें ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ का चुनाव चिह्न मिला है। चुनाव आयोग के इस फैसले से ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगा।
ममता ने 2021 चुनाव में दिया था ‘खेला होबे’ का नारा
2021 का बंगाल विधानसभा चुनाव याद हो तो ममता बनर्जी ने ‘खेला होबे’ नारे और फुटबॉल को राजनीतिक हथियार बनाया था। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के दिशा निर्देश में ममता बनर्जी और TMC चुनाव में बीजेपी को मात देने के लिए अलग अलग तरकीबें आजमा रही थींं। 10 मार्च 2021 को नंदीग्राम से नामांकन दाखिल करते समय ममता के पैर में चोट लग गई थी। डॉक्टरों ने फ्रैक्चर बताया।
व्हीलचेयर पर बैठी फुटबॉल को किया था किक
डॉक्टरों की आराम की सलाह को दरकिनार करते हुए ममता बनर्जी 13 मार्च को कोलकाता के हाजरा मोड़ पर आयोजित रैली में पहुंचीं। पूर्व सीएम ने ना सिर्फ मंच से बीजेपी के खिलाफ हुंकार भरी, बल्कि व्हीलचेयर पर बैठी-बैठी फुटबॉल किक मारकर ‘खेला होबे’ का संदेश दिया। उनका जनता से यूं जुड़ने का तरकीब कामयाब भी रहा। परिणाम स्वरूप चुनाव में TMC ने प्रचंड जीत हासिल की। पार्टी को 215 सीटें मिलीं, जबकि भाजपा 77 सीटों पर ही सिमट गई।
2026 चुनाव में बदल गई तस्वीर
मगर 2026 आते-आते तस्वीर पूरी बदल गई। बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे आने के बाद ममता के साथ ही 'खेला हो गया।' करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस तीन टुकड़े में बंट चुकी हैं। काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में करीब 20 सांसद बागी होकर एनसीपीआई में शामिल हो गए। वहीं कोलकाता में ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में लगभग 60 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। 80 में से 60 विधायकों के अलग होने के बाद ऋतब्रत बनर्जी पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं।
ममता बनर्जी के साथ बड़ा खेला!
2021 चुनाव में टूटे पैर से फुटबॉल किक मारकर भाजपा को चुनौती देने वाली ममता बनर्जी को अब अपनी नई पार्टी की पहचान बचाने के लिए उसी फुटबॉल खिलाड़ी चिह्न का सहारा लेना पड़ रहा है। राजनीतिक विश्लेषक इसे विडंबना बता रहे हैं। अब देखना होगा कि बर्बाद हो चुकी पार्टी को इस नए चिह्न के साथ ममता बनर्जी कितना फिर से खड़ा कर पाती हैं। क्या ममता फिर अपने दम पर पार्टी को बचा पाएंगी? नंदीग्राम उपचुनाव और आगे की सियासी हलचल पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
Published By : Rupam Kumari
पब्लिश्ड 18 September 2026 at 23:43 IST