'जिंदगी और मौत का सवाल है, डरा नहीं हकीकत...', अब SIR को लेकर AIMIM चीफ ओवैसी ने ऐसा क्यों कहा? कर दी बड़ी अपील

हैरादबाद में AIMIM की बैठक के दौरान औवेसी ने पदाधिकाकारियों को संबोधित करते हुए SIR को लेकर बड़ी बात कही है। जानतें हैं ओवैसी ने एसआईआर को जिंदगी-मौत का सवाल क्यों बता दिया?

 
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AIMIM Chief Asaduddin Owaisi | Image: ANI

तेलंगाना में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। SIR को लेकर राज्य में सियासत गरमा गई है। इस बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने इसे लेकर ना सिर्फ चिंता जताई है, बल्कि एसआईआर को जीवन-मरण का मामला बता दिया है। उन्होंने मजलिस कार्यकर्ताओं से बड़ी अपील भी की है।

हैरादबाद में AIMIM की बैठक के दौरान औवेसी ने पदाधिकाकारियों को संबोधित करते हुए SIR को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा, "क्योंकि यह मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के जिम्मेदार लोगों की बैठक है, न कि कोई आम बैठक, इसलिए मेरी आप सभी से गुजारिश है कि SIR 25 जून से शुरू होगा। मैं आप सभी से गुजारिश करता हूं कि इसे बहुत गंभीरता से लें।"

अब ये जिंदगी-मौत का सवाल है-ओवैसी?

औवेसी ने बैठक को संबोधित करते हुए आगे कहा, "SIR को लेकर मैं यह बात आपको डराने या भावुक करने के लिए नहीं कह रहा हूं, बल्कि यह जीवन-मरण का सवाल है। पिछले डेढ़ महीने से, अगर भारत में कोई ऐसी राजनीतिक पार्टी है जो SIR में मतदाताओं के नाम शामिल करवाने के लिए काम कर रही है, तो उस पार्टी का नाम मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन है।"

May 29, 2026

SIR को लेकर AIMIM की रणनीति

ओवैसी ने अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को दो टूक कहा कि इस चुनावी कसरत को किसी भी हाल में हल्के में न लिया जाए, क्योंकि यह हमारे लिए जीवन और मृत्यु का मामला है। AIMIM सूत्रों के मुताबिकस, SIR को लेकर पार्टी स्तर पर पहले से ही जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को इसकी जानकारी दे रहे हैं, साथ ही जरूरी दस्तावेज को पूरा करने में मदद कर रहे हैं।

विपक्ष का BJP पर आरोप

बता दें कि विपक्षी दलों ने भी SIR की प्रक्रिया पर आशंका जताई थी। साथ ही चुनाव आयोग और BJP पर गठजोड़ का भी आरोप लगाया था। ऐसे में ओवैसी की इस अपील को भी विपक्ष की राजनीति का हिस्सा के रूप में भी देखा जा रहा है, ताकि मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए ना जा सके। मतदाता सूची में नाम दर्ज होना मताधिकार के प्रयोग के लिए जरूरी है।

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Published By : Rupam Kumari

पब्लिश्ड 30 May 2026 at 09:30 IST