अपडेटेड 12 January 2026 at 23:06 IST
Arnab Vs AI: भारत से Maoist Terrorism का खात्मा क्यों जरूरी? अर्नब गोस्वामी के सवाल पर AI ने दिया जवाब, P-D-D का जिक्र कर बताया सच
रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी ने पूछा कि भारत से Maoist Terrorism का खात्मा क्यों जरूरी है? इसपर AI ने जवाब दिया, 'Maoist Terrorism जरूर समाप्त होना चाहिए क्योंकि ये एक बार में तीन चीजों को खत्म कर देती हैं।
Arnab Vs AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब प्रयोगशाला से निकलकर तेजी से हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में दाखिल हो रहा है। इसके बाद दुनिया भर के लोगों के सामने एक बुनियादी सवाल खड़ा हो गया है कि क्या मशीनें वाकई उस दुनिया को समझ सकती हैं, जिसे वो आकार दे रही हैं? इन्हीं सब सवालों को लेकर रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर इन चीफ ने अपने शो 'नेशन वांट्स टू नो' पर AI से डिबेट किया। 'Arnab Vs AI' स्पेशल डिबेट में हर उन मुद्दों पर सवाल किया गया जो सीधे तौर पर राष्ट्रहित और आम जनता से जुड़ी थी।
शो में कई बार तो ऐसा हुआ जब अर्नब के सवालों से AI भी चकमा खा गई। अर्नब ने पूछा कि भारत से Maoist Terrorism का खात्मा क्यों जरूरी है? इसपर AI ने जवाब दिया, 'Maoist Terrorism जरूर समाप्त होना चाहिए क्योंकि ये एक बार में तीन चीजों को खत्म कर देती हैं। जनता, विकास और लोकतंत्र (People, Development and Democracy). वो बेकसूर नागरिकों और सुरक्षाबलों की हत्या करते हैं। वो सड़के, स्कूलों और टेलीकॉम टावरों को जलाकर राख कर देते हैं।
गरीबों का होता है शोषण
इस सवाल के जवाब में AI ने आगे कहा कि Maoist Terrorist गरीबों का शोषण करते हैं। कौन सा समाज हथियारों से लैसे ऐसे लोगों को को अपनाना चाहेगा जो सड़कों, चुनावों को नुकसान पहुंचाते हों और कानून का पालन ना करते हों। वो जमीन, जंगल के अधिकारों को लेकर बहस कर सकते हैं लेकिन बैलेट के खिलाफ बुलेट लाना कोई राजनीति नहीं है। यह पूरी तरीके से समाज को पीछे धकेलने का काम है। भारत में संविधान है और उसके अधीन ही न्याय की प्रक्रिया है ना कि बंदूक के दम पर।
क्या था Arnab Vs AI डिबेट का मुख्य मुद्दा?
Arnab Vs AI सिर्फ एक TV डिबेट नहीं थी बल्कि हर उन बड़े सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश थी जो आज पूरी दुनिया के सामने है। सवाल ये कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सचमुच मानव बुद्धि के बराबर या उससे आगे जा सकता है? क्या AI समाज, सत्ता, संघर्ष, नैतिकता, विवेक और मानवीय भावनाओं को समझ सकता है?
Published By : Ankur Shrivastava
पब्लिश्ड 12 January 2026 at 22:53 IST