अपडेटेड 12 February 2026 at 21:47 IST
'एपस्टीन से पहली मुलाकात में मैं असहज था, कुल 4 बार मिले होंगे, इसका मतलब ये नहीं...', हरदीप पुरी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को बताया बेतुका
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अर्नब गोस्वामी के साथ एक खास इंटरव्यू में एपस्टीन फाइल्स में अपना नाम आने पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि एपस्टीन से उनकी सिर्फ 4 मुलाकातें हुईं, पहली बार ही उन्हें एपस्टीन पसंद नहीं आया।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी इन दिनों जेफरी एपस्टीन फाइल्स (Epstein files) में नाम आने के बाद चर्चाओं में हैं। Republic Media Network Editor-in-Chief Arnab Goswami के साथ एक खास इंटरव्यू में जेफरी एपस्टीन फाइल्स में अपना नाम आने पर उन्होंने खुलकर चर्चा की है। ये फाइल्स US Department of Justice (DOJ) ने जारी की हैं, जिसमें एपस्टीन के सेक्स स्कैंडल से जुड़े दस्तावेज हैं।
एपस्टीन फाइल बेहद विवादित हैं। ये दस्तावेज अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा कुख्यात अमेरिकी फाइनेंसर और बाल यौन शोषणकर्ता जेफरी एपस्टीन (Jeffrey Epstein) द्वारा रचे गए यौन कांड की जांच के तहत जारी किए गए हैं। अर्नब गोस्वामी के साथ इंटरव्यू में हरदीप पुरी ने एपस्टीन फाइलों में अपनी मौजूदगी का बचाव करते हुए कई सवाल उठाए।
एपस्टीन की फाइलों में 163 बार नाम?
हरदीप सिंह पुरी का नाम कथित तौर पर एपस्टीन से जुड़ी फाइलों में 163 बार सामने आया है। उन्होंने साफ किया कि उन्होंने एपस्टीन से ज्यादा से ज्यादा 4 बार मुलाकात की थी, वो भी 2009 से 2017 के बीच। पहली मुलाकात में ही उन्हें एपस्टीन से मिलकर अजीब लगा और बेचैनी महसूस हुई थी। उन्होंने कहा-
"मई-जून 2009 से 2017 तक, न्यूयॉर्क में मेरे आठ साल के दौरान, उस व्यक्ति से मेरी कुल चार मुलाकातें हुईं। आठ साल में चार मुलाकातें... तीन या चार से ज्यादा मुलाकातें नहीं हुईं या कहूं तो चार ही होंगी।"
एपस्टीन के साथ ईमेल क्यों हुए?
अर्नब गोस्वामी ने केंद्रीय मंत्री से सवाल किया कि उन्होंने एपस्टीन के साथ ईमेल का आदान-प्रदान क्यों किया? हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया कि यह बातचीत लिंक्डइन (LinkedIn) के सह-संस्थापक रीड हॉफमैन (Reid Hoffman) के साथ उनकी मुलाकात के संबंध में थी। उन्होंने कहा-
"भगवान के लिए, मुझे वह ईमेल दिखाइए। मैं उसे पढ़कर सुना सकता हूं… यह लिंक्डइन के संस्थापक रीड हॉफमैन के साथ हुई बातचीत है और मैं एक आम नागरिक था, जब मेरी उनसे मुलाकात हुई। मैं लॉस एंजिल्स में उनसे मिला, तो मैंने उनसे कहा कि भारत डिजिटल इनोवेशन, इंटरनेट के प्रसार, मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया पर चर्चा करना चाहते थे। ये पूरी तरह प्रोफेशनल था।"
उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, "मैं आतंकवादियों से संपर्क में रहा हूं, क्या इससे मैं आतंकवादी हो जाता हूं?" उन्होंने LTTE चीफ वेलुपिल्लई प्रभाकरन से बातचीत का उदाहरण दिया, जो उनके काम का हिस्सा था।
एपस्टीन को 2014 में भेजा ईमेल
पुरी द्वारा 23 जून, 2014 को एपस्टीन को भेजे गए एक ईमेल में लिखा था, "जेफरी, दिल्ली लौटने के बारे में आपका संदेश अभी देखा। रीड हॉफमैन की यात्रा में सहायता और सुविधा देने में मुझे खुशी होगी।" हरदीप सिंह पुरी ने यह भी दावा किया कि जब वह पहली बार एपस्टीन से मिले तो उन्हें बेचैनी का एहसास हुआ।
पुरी ने जोर दिया कि एपस्टीन के बारे में उन्हें 2013 तक कोई खास जानकारी नहीं थी। जैसे ही उनकी गलत हरकतें सामने आईं, उन्होंने सारे संपर्क तोड़ दिए। उन्होंने कहा कि फाइल में नाम आने से कोई गलत मतलब नहीं निकाला जा सकता, जैसा कि अमेरिकी DOJ ने भी डिस्क्लेमर में लिखा है कि नाम आने का मतलब गलत काम नहीं है। पुरी का कहना है कि ये सब प्रोफेशनल नेटवर्किंग था, कोई गलत इरादा या कनेक्शन नहीं था।
Published By : Sagar Singh
पब्लिश्ड 12 February 2026 at 19:41 IST