संसद में आज का दिन अहम, एंटी-पेपर लीक बिल पर होगी बहस, विपक्ष भी चर्चा को तैयार; 6 घंटे का समय है तय
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की पहल के बाद विपक्ष 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा के लिए सहमत हो गया है।
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Anti-Paper Leak Bill: नीट पेपर लीक विवाद के कारण एक सप्ताह तक संसद की कार्यवाही बाधित रहने के बाद मंगलवार को मॉनसून सत्र की पहली महत्वपूर्ण विधायी बहस होने की संभावना है। विपक्ष हंगामे के बीच लोकसभा में पेपर लीक कानून संशोधन बिल पर चर्चा के लिए तैयार हो गया है।
संसदीय सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित होने के बाद विभिन्न दलों के नेताओं के साथ बातचीत की जो रंग लाई। ओम बिरला की पहल के बाद विपक्ष 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा के लिए सहमत हो गया है।
चर्चा के लिए 6 घंटे का समय तय
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने बिल पर चर्चा के लिए 6 घंटे का समय तय किया है। हालांकि, इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है। चर्चा दोपहर 12 बजे शुरू होने की संभावना है।
सरकार-विपक्ष को स्पीकर ने दिया था समय
सोमवार को बिरला ने सदन की कार्यवाही शाम 5 बजे तक के लिए रोक दी और सरकार और विपक्ष को आपसी मतभेद दूर करने के लिए तीन घंटे का समय दिया। उन्होंने सांसदों को यह भी याद दिलाया कि बहस के लिए छह घंटे तय थे और अगर जरूरत पड़ी तो आगे अतिरिक्त समय भी मिल सकता है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़ा है।
विपक्षी नेताओं से मिले स्पीकर
इसके अलावा स्पीकर ने कहा कि सदन बिलों पर चर्चा के लिए चुना गया है, नारेबाजी के लिए नहीं। उन्होंने कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव सहित विपक्षी नेताओं से अलग-अलग बात भी की। सूत्रों के अनुसार, इन बैठकों के बाद विपक्ष विधेयक पर चर्चा के लिए तैयार हो गया।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार को 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक' 2026 पेश किया। जितेंद्र सिंह के विधेयक पेश करने के कुछ मिनटों बाद ही विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया और कुछ मिनटों बाद ही सदन में हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
विधेयक में सख्त प्रावधान और नियम
इस विधेयक का मकसद पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली धांधली के खिलाफ कानूनी व्यवस्था को और अधिक सख्त बनाना है। इसके तहत दोषियों के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। इसमें 10 साल तक की जेल, 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना, दोषियों की संपत्ति जब्त करना और मामलों का फैसला तीन महीने के भीतर सुनिश्चित करने की व्यवस्था शामिल है।
Published By : Priyanka Yadav
पब्लिश्ड 28 July 2026 at 08:16 IST