Parliament: आधी आबादी को मिलेगा पूरा हक! गुरुवार को लोकसभा में अमित शाह- मेघवाल पेश करेंगे महिला आरक्षण बिल, विपक्ष ने की विरोध की तैयारी
Parliament Session: 16 से 18 अप्रैल 2026 तक संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है, जिसमें मुख्य फोकस महिला आरक्षण कानून को लागू करने पर है। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
Women’s Reservation and Delimitation Bill 2026: गुरुवार (16 अप्रैल) से संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र शुरू होने जा रहा है। ये सत्र कई मायनों में खास होगा। मोदी सरकार तीन दिन के स्पेशल सत्र में तीन अहम बिल लेकर आ रही है, जिसमें सबसे ज्यादा चर्चा महिला आरक्षण बिल को लेकर हो रही है।
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम , 2023 में संशोधन पेश करेंगे। इस दौरान पीएम मोदी भी गुरुवार को सत्र को संबोधित कर सकते हैं। वहीं, सदन में विपक्षी पार्टियां इस बिल के विरोध करेंगी।
लोकसभा में बिल के लिए 18 घंटे का समय निर्धारित
महिला आरक्षण से जुड़े इस बिल पर लोकसभा में 16 और 17 अप्रैल को चर्चा होगी और उसके बाद वोटिंग कराई जाएगी। बिल के लिए निचले सदन में कुल 18 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। वहीं, 18 अप्रैल को राज्यसभा में इस बिल पर चर्चा और वोटिंग होगी। वहां चर्चा के लिए 10 घंटे का समय तय हुआ है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023, जिसमें महिला विधायकों के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है और यह लोकसभा में परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। सरकार 2029 के आम चुनावों से पहले महिला आरक्षण को लागू करने की योजना बना रही है। "इसके लिए सरकार 2023 के अधिनियम में संशोधन करेगी और एक संवैधानिक संशोधन लाकर परिसीमन प्रक्रिया को आगामी जनगणना से अलग करने का प्रावधान करेगी।
सूत्रों के अनुसार, सरकार ने लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा है, जिसमें से 815 सीटें राज्यों के लिए और बाकी 35 केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होंगी। वर्तमान में लोकसभा में 543 सीटें हैं।
विपक्षी नेताओं ने की बैठक
संसद के विशेष सत्र से पहले कांग्रेस ने बुधवार (15 अप्रैल) को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास में संसदीय रणनीति समूह की एक बैठक आयोजित की। बैठक में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, RJD के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव, NCP (SP) सांसद सुप्रिया सुले, शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत, राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल और INDI गठबंधन के कई नेता मौजूद रहे।
विपक्ष ने साफ किया कि वह महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है और केंद्र से नारी शक्ति वंदन अधिनियम , 2023 को लागू करने का आग्रह किया, लेकिन परिसीमन प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। उनका मानना है कि इससे लोकसभा में दक्षिणी और उत्तर-पूर्वी राज्यों का प्रतिनिधित्व कमजोर होता है।
‘हम बिल के खिलाफ नहीं, लेकिन…’
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हम महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है लेकिन सरकार इसे राजनीतिक कारणों से आगे बढ़ा रही है जिससे विपक्ष को दबाया जा सके। इसलिए हमने परिसीमन बिल के विरोध का फैसला लिया है। पूरा विपक्ष बिल के खिलाफ वोट करेगा।
Published By : Ruchi Mehra
पब्लिश्ड 15 April 2026 at 22:51 IST