'गोली का जवाब गोली से देंगे, नक्सली हथियार डाल दें, नहीं तो...', लोकसभा में नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान गरजे अमित शाह, कांग्रेस को घेरा

Amit Shah: गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि हम एक लोकतंत्र में रहते हैं। हमने इस देश के संविधान को अपनाया है। यह ऐसी सरकार नहीं है जो किसी की धमकियों के आगे झुक जाए। यह एक ऐसी सरकार है जो सभी को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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नक्सलवाद पर बोले अमित शाह | Image: Sansad TV

Amit Shah in Lok Sabha: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में नक्सलवाद के मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मुझे इस बात की बहुत खुशी है कि देश और हम सबके लिए बहुत महत्वपूर्ण एक घटनाक्रम, जो 1970 से 2026 तक चला, उसके बारे में आज संसद में चर्चा हो रही है।  उन्होंने कहा कि बस्तर से नक्सलवाद लगभग समाप्त हो गया है। बस्तर के अंदर हर गांव में स्कूल बनाने की मुहिम चली। बस्तर के अंदर हर गांव में राशन की दुकान खोलने की मुहिम चली।

अमित शाह ने कहा कि बस्तर में लाल आतंक की परछाई थी, इसलिए वहां विकास नहीं पहुंचा था, आज परछाई हट गई है और बस्तर विकसित हो रहा है।

जो भी हथियार उठाएगा, उसको हिसाब चुकाना होगा- शाह

उन्होंने कहा कि जो वकील बन रहे हैं, एक हथियारी मूवमेंट के... कहते हैं हम अन्याय के खिलाफ लड़ रहे हैं। संविधान को मानोगे या नहीं मानोगे? अन्याय के लिए संविधान में हैं, अदालतें बनी हैं, विधानसभाएं बनी हैं, जिला पंचायत, तहसील पंचायतें बनी हैं। ये पूरी व्यवस्था को नकारकर हाथ में हथियार उठा लोगे, ऐसा नहीं चलेगा।  ये नरेंद्र मोदी की सरकार है, जो भी हथियार उठाएगा, उसको हिसाब चुकाना होगा।

गृह मंत्री ने कांग्रेस से सवाल किया कि 75 सालों में से 60 साल तक तो शासन आपने किया। आदिवासी अब तक विकास के बैगर क्यों बच गए? विकास तो अब आकर नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। 60 साल तक घर नहीं दिया, पानी नहीं दिया, स्कूल नहीं बने, मोबाइल टॉवर नहीं पहुंचने दिए, बैंक की सुविधा नहीं पहुंचने दी। अब आप हिसाब मांग रहे हो। थोड़ा तो अपने गिरेबान में झांककर देखो कि दोषी कौन हैं।

‘नक्सलवाद की जड़ विकास की मांग नहीं…’

अमित शाह ने आगे कहा कि नक्सलवाद की जड़ विकास की मांग नहीं है। यह एक विचारधारा है- एक ऐसी विचारधारा जिसे इंदिरा जी ने 1970 में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए अपनाया था। नक्सलवाद ठीक इसी वामपंथी विचारधारा के कारण फैला है। 12 राज्य- छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, झारखंड, बिहार, बंगाल, केरल, कर्नाटक के कुछ हिस्से और उत्तर प्रदेश के तीन जिले इससे प्रभावित हुए। एक पूरा 'रेड कॉरिडोर' बन गया, और वहां कानून का राज खत्म हो गया। 12 करोड़ लोग सालों तक गरीबी में जीते रहे और किसी ने कोई चिंता नहीं जताई। हजारों युवा जानें चली गईं। कई लोग हमेशा के लिए विकलांग या अपाहिज हो गए। इसके लिए कौन जिम्मेदार है?

उन्होंने कहा कि नक्सलियों को लोकतंत्र में कोई आस्था नहीं है। यहां कई लोगों ने कहा कि वे अन्याय के खिलाफ लड़ रहे हैं। लेकिन आखिर आपकी लड़ने की पद्धति क्या है? अब हम ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के अधीन नहीं जी रहे हैं। कुछ लोगों ने तो यहां तक कह दिया कि वे भगत सिंह और बिरसा मुंडा से तुलना कर रहे हैं। यह कितनी बड़ी गुस्ताखी है? आप भगत सिंह और बिरसा मुंडा जैसे शहीदों की- विशेष रूप से भगवान बिरसा मुंडा की, जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। तुलना उन लोगों से कर रहे हैं जो संविधान का उल्लंघन करते हैं, हथियार उठाते हैं और निर्दोष लोगों की हत्या करते हैं? ऐसे गंभीर मामलों पर बात करते समय व्यक्ति को संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर उठना चाहिए।

गृह मंत्री ने कहा कि हम एक लोकतंत्र में रहते हैं। हमने इस देश के संविधान को अपनाया है। यह ऐसी सरकार नहीं है जो किसी की धमकियों के आगे झुक जाए। यह एक ऐसी सरकार है जो सभी को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

‘सरकार की पॉलिसी है, जो हथियार डाल देता है, उसी से…’

अमित शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ के बस्तर में इन्होंने समानांतर सरकार चलाई और विकास की योजनाओं को रोकने का काम किया। जो बातचीत की बात कर रहे हैं, उनको बताना चाहता हूं कि बस्तर की हर तहसील में जाकर कह चुका हूं कि हथियार डाल दीजिए, सरकार आपका पुनर्वास करेगी। यह हमारी सरकार की नीति है: बातचीत केवल उन्हीं से होगी जो अपने हथियार डाल देंगे; जो गोलियों का इस्तेमाल करेंगे, उन्हें गोलियों से ही जवाब दिया जाएगा।

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Published By : Ruchi Mehra

पब्लिश्ड 30 March 2026 at 19:20 IST