पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने पर अमित मालवीय ने विपक्ष के मुंह पर लगा दिया ताला, बताया किस देश में हुई कितनी बढ़ोतरी, आंकड़े देख उड़ जाएंगे होश
आज से देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। हालांकि इस ऐलान के बाद जहां आम आदमी को झटका लगा तो वहीं विपक्ष को सरकार को घेरने के लिए एक बड़ा मुद्दा मिल गया। भाजपा के आईटी सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय ने अपनी एक्स पोस्ट के जरिए सभी विपक्षी पार्टियों के मुंह पर ताला लगाने का काम किया है।
आज से देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है, तो वहीं सीएनजी के दामों में भी 2 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। हालांकि इस ऐलान के बाद जहां आम आदमी को झटका लगा तो वहीं विपक्ष को सरकार को घेरने के लिए एक बड़ा मुद्दा मिल गया। लेकिन भाजपा के आईटी सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय ने अपनी एक्स पोस्ट के जरिए सभी विपक्षी पार्टियों के मुंह पर ताला लगाने का काम किया है।
अमित मालवीय ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से वैश्विक ईंधन की कीमतों में आई तेज़ी से यह साफ़ पता चलता है कि अलग-अलग देशों ने आर्थिक झटकों का सामना कैसे किया है। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने और तेल की खेप में लंबे समय तक रुकावट आने की वजह से, अप्रैल के ज़्यादातर दिनों और मई की शुरुआत में कच्चे तेल की कीमत $100 प्रति बैरल से ऊपर पहुँच गई थी।
भाजपा नेता ने कहा कि युद्ध के कारण पूरी दुनिया में ग्राहकों ने ईंधन स्टेशनों पर इसका सीधा असर महसूस किया है। उन्होंने कहा कि 23 फरवरी से 15 मई 2026 के बीच, लगभग हर बड़ी अर्थव्यवस्था में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली।
किस देश में हुई कितनी बढ़ोतरी
अमित मालवीय ने इस सबको लेकर एक पूरा चार्ट भी पोस्ट किया जिसमें दुनिया के विभिन्न देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों की बढ़ोतरी दर बताई गई है। इस चार्ट के अनुसार
- म्यांमार: पेट्रोल +89.7%, डीज़ल +112.7%
- मलेशिया: पेट्रोल +56.3%, डीज़ल +71.2%
- पाकिस्तान: पेट्रोल +54.9%, डीज़ल +44.9%
- UAE: पेट्रोल +52.4%, डीज़ल +86.1%
- संयुक्त राज्य अमेरिका: पेट्रोल +44.5%, डीज़ल +48.1%
- श्रीलंका: पेट्रोल +38.2%, डीज़ल +41.8%
- UK: पेट्रोल +19.2%, डीज़ल +34.2%
- जर्मनी: पेट्रोल +13.7%, डीज़ल +19.8%
- जापान: पेट्रोल +9.7%, डीज़ल +11.2%
- भारत: पेट्रोल: +3.2% डीज़ल: +3.4%
इन सभी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत में ही सबसे कम बढ़ोतरी दर्ज की गई है जो महज 3.2 से 3.4 प्रतिशत की है। इसमें केवल सऊदी अरब ने ही कीमतों में कोई बदलाव न होने की जानकारी दी, जिसकी वजह वहाँ की सरकारी सब्सिडी व्यवस्था थी।
भारत में ही सबसे कम बढ़ोतरी हुई
अमित मालवीय ने पोस्ट में आगे लिखा कि उन्होंने कहा कि बाज़ार-आधारित बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत में ही असल में सबसे कम बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि यह सब इत्तेफ़ाक से नहीं हुआ। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद के 76 दिनों तक, ईंधन की खुदरा बिक्री का लगभग 90% हिस्सा संभालने वाली भारत की सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों ने वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद, कीमतें लगभग जस की तस बनाए रखीं।
नुकसान ₹1,000 करोड़ तक पहुँच गया था
भाजपा के आईटी सेल के अध्यक्ष ने कहा कि सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों ने कीमतों का बोझ तुरंत नागरिकों पर डालने के बजाय, रिफ़ाइनरी गेट पर होने वाले भारी नुकसान को खुद ही उठाया। रिपोर्ट किए गए अनुमानों के मुताबिक, रोज़ाना होने वाला यह नुकसान लगभग ₹1,000 करोड़ तक पहुँच गया था। 15 मई को घोषित ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी लगभग चार सालों में पहली कीमत बढ़ोतरी है, और यह लगभग ₹95 प्रति लीटर के आधार पर सिर्फ़ 3.5% की बढ़ोतरी है।
कई देशों में 50–100% की बढ़ोतरी देखी गई
अमित मालवीय की इस पोस्ट के अनुसार पाकिस्तान लोग तीन महीने पहले के मुकाबले अब पेट्रोल के लिए लगभग 55% ज़्यादा पैसे दे रहे हैं, जबकि मलेशिया के लोग 56% से ज़्यादा। तो वहीं अमेरिका के लोग लगभग 45% ज़्यादा कीमत चुका रहे हैं। कई देशों में डीज़ल की कीमतों में 50–100% की बढ़ोतरी देखी गई है, जो व्यापार, लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई में आई रुकावटों को दिखाता है।
महंगाई को काबू में रखा
अमित मालवीय ने कहा “लेकिन भारत ने एक सोची-समझी बढ़ोतरी लागू करने से पहले, दो महीने से ज़्यादा समय तक ग्राहकों को दुनिया भर में कीमतों में हो रहे उतार-चढ़ाव से बचाए रखा। यह बात इसलिए मायने रखती है, क्योंकि ईंधन की कीमतें सिर्फ़ पेट्रोल पंप तक ही सीमित नहीं रहतीं। वे परिवहन लागत, खाने-पीने की चीज़ों की महंगाई, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और घरों के बजट पर असर डालती हैं। ईंधन की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव को काबू में रखने का मतलब महंगाई को भी काबू में रखना है। जहाँ दुनिया के ज़्यादातर हिस्सों ने 10% से 90% तक की बढ़ोतरी को झेलते हुए खुद को हालात के मुताबिक ढाला, वहीं भारत ने अपने नागरिकों पर पड़ने वाले असर को सिर्फ़ 3% से थोड़ा ही ज़्यादा तक सीमित रखा।
Published By : Kritarth Sardana
पब्लिश्ड 15 May 2026 at 14:15 IST