एयर मार्शल विक्रम गौर ने रचा इतिहास, रक्षा मंत्रालय में अहम पद पाने वाले पहले भारतीय वायु सेना अधिकारी बने; 3200+ घंटे फाइटर जेट उड़ाने का अनुभव

एयर मार्शल विक्रम गौर को रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत 'डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स' में अतिरिक्त सचिव नियुक्त किया गया है।

 
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एयर मार्शल विक्रम गौर ने रचा इतिहास, रक्षा मंत्रालय में मिला अहम पद | Image: ANI

एयर मार्शल विक्रम गौर को रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत 'डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स' (DMA) में अतिरिक्त सचिव नियुक्त किया गया है। वे इस पद पर पहुंचने वाले भारतीय वायु सेना (IAF) के पहले अधिकारी बन गए हैं। एक बेहतरीन फाइटर पायलट के रूप में, गौर ने अपने करियर के दौरान कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। इनमें 'संयुक्त सचिव (वायु और स्टाफ ड्यूटी)' का पद और जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख के 'एयर ऑफिसर कमांडिंग' का पद शामिल है।

नियुक्ति की जानकारी देते हुए बताया गया कि यह भारतीय वायु सेना के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि यह विभाग सैन्य मामलों और सशस्त्र बलों के बीच समन्वय (coordination) के लिए जिम्मेदार है। अब तक इस पद पर वायुसेना के किसी अधिकारी की नियुक्ति नहीं हुई थी, जिससे यह फैसला भारतीय रक्षा क्षेत्र और थल-जल-नभ तीनों सेनाओं के संयुक्त तालमेल के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

कौन है एयर मार्शल विक्रम गौर?

एयर मार्शल विक्रम गौर के पास व्यापक उड़ान अनुभव है और उन्होंने अपने करियर में कई ऑपरेशनल और स्टाफ पदों पर काम किया है। उन्होंने Su-30MKI सहित विभिन्न लड़ाकू विमानों को उड़ाते हुए 3,200 घंटे से अधिक का समय बिताया है। वे 'डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स' में 'संयुक्त सचिव (वायु और स्टाफ ड्यूटी)' के रूप में भी काम कर चुके हैं। इससे पहले वे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए 'एयर ऑफिसर कमांडिंग' के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

October 27, 2026

रक्षा मंत्रालय में मिली बड़ी जिम्मेदारी

इस नियुक्ति के जरिए एक अनुभवी फाइटर पायलट को रक्षा मंत्रालय में एक वरिष्ठ प्रशासनिक भूमिका मिली है। बता दें कि 'डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स' का गठन 2019 में किया गया था। इसका उद्देश्य थल सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच समन्वय और आपसी तालमेल को मजबूत करना था। इसके प्रमुख 'चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ' (CDS) होते हैं। यह विभाग सशस्त्र बलों से जुड़े मामलों को संभालता है, जिसमें उनका एकीकरण (integration) और प्रशासनिक जरूरतें शामिल हैं।

 घंटे फाइटर जेट उड़ाने का अनुभव

ऑपरेशनल कमांड और रक्षा प्रशासन, दोनों क्षेत्रों में गौर का अनुभव इस विभाग की जिम्मेदारियों के लिए बहुत उपयुक्त है। ऑपरेशनल भूमिकाओं में तय इलाकों में वायु सेना की गतिविधियों की देखरेख करना शामिल होता है, जबकि स्टाफ पदों पर सैन्य ढांचे के भीतर समन्वय, योजना बनाने और नीतिगत कार्यों को अंजाम देना होता है। Su-30MKI जैसे विमानों को उड़ाने का उनका अनुभव यह दिखाता है कि उनका करियर मुख्य रूप से लड़ाकू अभियानों (fighter operations) से जुड़ा रहा है। यह दो इंजन वाला लड़ाकू विमान, भारतीय वायु सेना के प्रमुख युद्धक विमानों में से एक है।

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Published By : Rupam Kumari

पब्लिश्ड 27 October 2026 at 22:30 IST