अपडेटेड 16 August 2025 at 11:44 IST

Krishna Janmashtami 2025: पंचामृत और चरणामृत में क्या है अंतर? जान लें बनाने का तरीका

Krishna Janmashtami 2025: पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में हमें पंचामृत और चरणामृत प्रसाद के रूप में दिया जाता है। कई लोग इन दोनों को एक ही जैसा समझ लेते हैं, लेकिन असल में ये दोनों अलग-अलग हैं। इन्हें बनाने का तरीका भी अलग है। आइए जानते हैं कि दोनों के बीच क्या अंतर है? इसके साथ उन्हें बनाने का सही तरीका और विधि क्या है?

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पंचामृत और चरणामृत में क्या है अंतर?

पूजा में मिलने वाले पंचामृत और चरणामृत अलग-अलग हैं। एक को पांच अमृतों का मिश्रण है। इसके साथ ही दूसरे को भगवान के चरणों का पवित्र जल है।

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पांच अमृतों का मिश्रण है पंचामृत

पंचामृत को दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बनाया जाता है। यह एक पौष्टिक भोग है जिसे देवताओं के अभिषेक यानि स्नान और फिर प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।

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कैसे बनाएं पंचामृत?

सभी पांच चीजों को एक साथ मिलाकर भोग लगाते समय उसमें तुलसी पत्ता डालते हैं। ऐसा माना जाता है कि इसका सेवन करने से सुख और शांति मिलती है।

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भगवान के चरणों के अमृत को कहते हैं चरणामृत

'चरणों का अमृत' यानी चरणामृत। यह वह पवित्र जल है जिससे भगवान की मूर्ति के चरणों को धोया यानि प्रक्षालन किया जाता है। इसमें तुलसी दल का होना अनिवार्य है।

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कैसे बनता है चरणामृत?

तांबे के बर्तन में जल और तुलसी के पत्ते डालकर भगवान के चरणों का अभिषेक किया जाता है। भगवान के स्पर्श से यह साधारण जल 'अमृत' बन जाता है।

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दोनों में क्या है मुख्य अंतर?

पंचामृत एक भोग है, जबकि चरणामृत श्रद्धा का प्रतीक है। पंचामृत शरीर को पुष्ट करता है और चरणामृत मन को शुद्ध करता है। दोनों को ही भगवान का आशीर्वाद माना जाता है।

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Published By : Kirti Soni

पब्लिश्ड 16 August 2025 at 11:44 IST