दो बहनें, एक राग और इतिहास में दर्ज बलिदान की गाथा... हार्दिक गज्जर लेकर आ रहे हैं फिल्म 'ताना-रीरी', लीड रोल में संस्कृति

निर्देशक हार्दिक गज्जर अभिनेत्री संस्कृति जयंना के साथ मिलकर गुजरात के वडनगर की महान संगीत साधिकाओं ताना और रीरी की ऐतिहासिक कहानी को बड़े पर्दे पर लेकर आ रहे हैं। फिल्म 'ताना-रीरी' में दोनों बहनों की अद्भुत संगीत प्रतिभा, साहस, बहनापे और बलिदान की गाथा दिखाई जाएगी।

दो बहनें, एक राग और इतिहास में दर्ज बलिदान की गाथा... हार्दिक गज्जर लेकर आ रहे हैं फिल्म 'ताना-रीरी', लीड रोल में संस्कृति | Image: Instagram

संगीत, साहस और बलिदान की एक ऐसी कालजयी गाथा, जिसने भारतीय इतिहास और संस्कृति में अपनी अमिट छाप छोड़ी। अब गुजरात की दो महान संगीत साधिकाओं ताना और रीरी की कहानी बड़े पर्दे पर देखने को मिलेगी। निर्देशक हार्दिक गज्जर अपनी आगामी फिल्म 'ताना-रीरी' के जरिए इस ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की तैयारी में हैं। फिल्म में अभिनेत्री संस्कृति जयंना भी अहम भूमिका निभाती नजर आएंगी।

ताना-रीरी की ऐतिहासिक कहानी को मिलेगा सिनेमाई रूप

गुजरात के वडनगर की रहने वाली ताना और रीरी भारतीय शास्त्रीय संगीत की ऐसी महान हस्तियां थीं, जिनकी गायकी और साहस की कहानियां आज भी सुनाई जाती हैं। उनकी संगीत साधना ने उन्हें इतिहास में एक विशेष स्थान दिलाया। फिल्म 'ताना-रीरी' के जरिए निर्देशक हार्दिक गज्जर भारतीय इतिहास के इसी गौरवशाली अध्याय को सिनेमाई अंदाज में प्रस्तुत करने जा रहे हैं। यह फिल्म केवल दो संगीत साधिकाओं की कहानी नहीं होगी, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और संगीत की शक्ति को भी दर्शाएगी। फिल्म के जरिए दर्शकों को उस दौर की दुनिया से रूबरू कराया जाएगा, जहां संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भावनाओं और मानवीय साहस की अभिव्यक्ति हुआ करता था।

जब राग मल्हार ने तानसेन को दी थी राहत

ताना और रीरी की कहानी का सबसे चर्चित प्रसंग महान संगीतकार तानसेन से जुड़ा है। मान्यता के अनुसार, एक बार तानसेन ने राग दीपक गाया था। इस राग के प्रभाव से उनका शरीर अत्यधिक गर्म हो गया था। कहा जाता है कि इस स्थिति से उन्हें राहत दिलाने के लिए ताना और रीरी ने राग मल्हार का गायन किया था। उनकी मधुर और प्रभावशाली गायकी ने तानसेन को राहत पहुंचाई थी।

यही प्रसंग इन दोनों बहनों को भारतीय संगीत इतिहास में विशेष पहचान दिलाता है। उनकी कहानी यह भी बताती है कि संगीत में केवल सुर और ताल ही नहीं, बल्कि जीवन को प्रभावित करने और कठिन परिस्थितियों से लड़ने की अद्भुत शक्ति भी होती है।

साहस, बहनापे और बलिदान की अनसुनी गाथा

ताना-रीरी की विरासत केवल उनकी संगीत प्रतिभा तक सीमित नहीं है। उनकी कहानी में बहनापे, अटूट संकल्प, सांस्कृतिक स्वाभिमान और बलिदान जैसे भाव भी शामिल हैं। यही वजह है कि उनकी ऐतिहासिक गाथा आज भी लोगों को प्रेरित करती है। निर्देशक हार्दिक गज्जर इस फिल्म के माध्यम से उस दौर की शास्त्रीय संगीत परंपराओं, राजसी संस्कृति और सामाजिक परिस्थितियों को पर्दे पर उतारने का प्रयास करेंगे। वहीं, अभिनेत्री संस्कृति जयंना इस ऐतिहासिक कहानी को जीवंत करने वाली कलाकारों की टीम का हिस्सा होंगी।

नई पीढ़ी तक पहुंचेगी भारतीय संगीत की विरासत

अथश्रीकथा मोशन पिक्चर्स एलएलपी के बैनर तले बन रही 'ताना-रीरी' का उद्देश्य इस गौरवशाली भारतीय गाथा को देश और दुनिया के दर्शकों तक पहुंचाना है। फिल्म की कहानी गुजरात की सांस्कृतिक जड़ों और भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपराओं से जुड़ी होगी। फिल्म की रिलीज डेट फिलहाल घोषित नहीं की गई है। हालांकि, इस ऐतिहासिक विषय को बड़े पर्दे पर लाने की घोषणा ने भारतीय संगीत और संस्कृति में रुचि रखने वाले दर्शकों के लिए उत्सुकता बढ़ा दी है। कुछ आवाजें वक्त के साथ खो जाती हैं, लेकिन कुछ आवाजें हमेशा के लिए अमर हो जाती हैं। ताना और रीरी की कहानी भी भारतीय संगीत की ऐसी ही विरासत है, जिसे अब सिनेमा के जरिए नई पहचान मिलने जा रही है।

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Published By : Aarya Pandey

पब्लिश्ड 30 October 2026 at 21:01 IST