गाय को रोटी खिलाने वालों और रोटी के साथ गाय खाने वालों में दोस्ती नहीं हो सकती... पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद बनवाने वालों को मनोज मुंतशिर का सीधा जवाब
मनोज मुंतशिर ने कहा कि दोस्ती तो मैं भी चाहता हूं। ऐसा नहीं है कि मुझे दोस्ती नहीं चाहिए। लेकिन दोस्ती के लिए तौर-तरीके बदलने होंगे। वरना गाय को रोटी खिलाने वालों में और गाय को रोटी के साथ खाने वालों में दोस्ती कैसे हो पाएगी?
- मनोरंजन समाचार
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Republic Manthan Summit 2026: मशहूर गीतकार, कवि और पटकथा लेखक मनोज मुंतशिर ने 'रिपब्लिक भारत' के मंथन समिट में अपने बेहतरीन अंदाज से समां बांध दिया। उन्होंने 1947 का एक किस्सा सुनाया। साथ ही कहा कि मेरी किसी धर्म से कोई दुश्मनी नहीं है। मुझे दोस्ती से भी कोई परहेज नहीं है। लेकिन इसके लिए तौर-तरीके बदलने होंगे। वरना एक तरफ गाय को रोटी खिलाने वाले और दूसरी तरफ गाय को रोटी के साथ खाने वालों के बीच दोस्ती कैसे हो सकती है?
मनोज मुंतशिर ने कहा, 'सन् 1947 में जब देश में अंतरिम सरकार बन रही थी, तब मोहम्मद अली जिन्ना और मुस्लिम लीग ने गृह मंत्रालय देने की मांग रखी थी। सरदार पटेल ने एक बात कही थी जो पता नहीं इतिहास के पन्नों में कहां दब गई। पटेल ने कहा था जिन्ना साहब माफ कीजिए, लेकिन चोर के हाथ में घर की चाभी नहीं दी जा सकती।'
'गाय को रोटी खिलाने और गाय खाने वालों के बीच दोस्ती नहीं...'
उन्होंने आगे कहा, 'मेरी किसी भी धर्म से कोई दुश्मनी नहीं है। मैं अपने धर्म में बहुत खुश हूं। लेकिन जो गलत तौर-तरीके हैं उन्हें एक्सपोज करना ही पड़ेगा। दोस्ती तो मैं भी चाहता हूं। ऐसा नहीं है कि मुझे दोस्ती नहीं चाहिए। लेकिन दोस्ती के लिए तौर-तरीके बदलने होंगे। वरना गाय को रोटी खिलाने वालों में और गाय को रोटी के साथ खाने वालों में दोस्ती कैसे हो पाएगी?'
पश्चिम बंगाल की बाबरी मस्जिद का किया जिक्र
इसके बाद मुंतशिर ने पश्चिम बंगाल की बाबरी मस्जिद का जिक्र करते हुए कहा, 'कोई और मस्जिद बनाइए, उसमें दो ईंटें मैं भी रखूंगा। हम भी अपने हिस्सा का योगदान देंगे। किसी भी तरह की मस्जिद बनाएं, लेकिन बाबरी मस्जिद? वो आतंकी, वो हिंदुओं का हत्यारा, उसके नाम पर आप मस्जिद बनाते हैं और फिर हमसे उम्मीद करते हैं कि दोस्ती रहेगी? आप औरंगजेब को जिंदा पीर कहते हैं, उसकी कब्र पर आंसू बहाते हैं, उसकी कब्र पर फातिहा पढ़ते हैं तो कैसे दोस्ती होगी? कब बदलेंगे आप? होना क्या चाहिए और तरीका क्या है? मेरे और आपके हाथ में क्या है? सबसे पहले की हम झुकेंगे नहीं। नहीं झुकेंगे तो नहीं झुकेंगे और न ही हमारा भगवा झुकेगा।'
ताजमहल प्यार की निशानी नहीं- मुंतशिर
इससे पहले मनोज मुंतशिर ने ताजमहल पर सवाल उठाते हुए कहा, 'लेफ्टिस्ट लिटरेचर ने और लेफ्टिस्ट सिनेमा ने ताजमहल को पता नहीं किस एंगल से प्यार की निशानी बना दिया है, जबकि यह अय्याशी की निशानी जरूर है। जब ताजमहल बन रहा था, उस जमाने में लगभग 32 लाख लोग भुखमरी से मर रहे थे, बहुत बड़ा अकाल पड़ा था। उस दौर के 9 करोड़ रुपये शाहजहां ने खर्च किए थे एक मकबरा बनवाने में, जिससे पूरे देश की भूख मिट सकती थी। मोहब्बत की निशानी, सात बीवियों में से एक बीबी थीं मुमताज महल, जो 14वें बच्चे को जन्म देते हुए प्रसव पीड़ा से मर गईं थीं, उन्हें फैक्ट्री बना दिया था बच्चे पैदा करने की।'
Published By : Priyanka Yadav
पब्लिश्ड 19 July 2026 at 22:54 IST