अपडेटेड 4 April 2025 at 11:03 IST
बैन की फिल्म तो इंदिरा गांधी से भिड़ गए थे Manoj Kumar, कोर्ट तक खींचा... सरकार के ऑफर को कहा दिया था- ना!
मनोज कुमार इकलौते एक्टर थे जिन्होंने सरकार से पंगा लिया, कोर्ट तक गए और जीते भी। इसके साथ ही उन्होंने सरकार की तरफ से मिले ऑफर को बिना झिझक के ठुकरा दिया।
Manoj Kumar Death: बॉलीवुड में कई एक्टर आए और गायब हो गए। कम ही अभिनेता ऐसे होते हैं जो अपनी एक अमिट छाप छोड़कर जाते हैं। इनमें से एक थे 'भारत कुमार' मनोज कुमार। जो एक्टर, फिल्म निर्देशक, गीतकार तो थे ही, लेकिन इन सबसे बढ़कर एक सच्चे देशभक्त थे। वहीं मनोज कुमार इस दुनिया को छोड़कर चले गए। आज (4 अप्रैल) को 87 साल की उम्र में कोकिलाबेन अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस लीं।
मनोज कुमार ने दशकों पर सिनेमा पर राज किया। वो खासतौर पर देशभक्ति से जुड़ी फिल्मों के लिए जाने जाते थे। उनसे जुड़े कई किस्से हैं। इनमें से ही एक किस्सा मनोज कुमार और पूर्व PM इंदिरा गांधी के बीच हुए विवाद से जुड़ा है।
मनोज कुमार इकलौते एक्टर थे जिन्होंने सरकार से पंगा लिया, कोर्ट तक गए और जीते भी। इसके साथ ही उन्होंने सरकार की तरफ से मिले ऑफर को बिना झिझक के ठुकरा दिया।
इमरजेंसी के विरोध में उतरे मनोज कुमार
वो दौर था इमजेंसी का। इससे पहले मनोज कुमार के इंदिरा गांधी समेत तमाम नेताओं के साथ संबंध अच्छे हुआ करते थे। साल 1975 में देश में आपातकाल की घोषणा की गई, तो मनोज कुमार खुलकर इसके विरोध में उतर आए। बताया जाता है कि उस दौर में जो कोई भी सितारा इमरजेंसी का विरोध करता तो उसकी फिल्मों को बैन कर दिया जाता था। ऐसा ही कुछ हुआ मनोज कुमार के साथ भी।
सरकार ने फिल्म पर लगाया बैन तो कोर्ट पहुंचे मनोज कुमार
साल 1972 में आई मनोज कुमार की 'शोर' सुपरहिट हुई थी। वह फिल्म के डायरेक्टर, प्रोड्यूसर होने के साथ ही राइटर भी थे। फिल्म के गाने भी बड़े हिट हुए। फिल्म की सफलता को देखते हुए मनोज कुमार ने इसे दोबारा रिलीज करने का सोचा। तारीख का भी ऐलान हो गया, लेकिन इमरजेंसी का विरोध करने पर सरकार उनसे नाराज हो गई थी। शोर के दोबारा थिएटर्स में रिलीज होने से पहले ही इसे दूरदर्शन पर रिलीज कर दिया। जिसका नतीजा ये निकला कि इसके बाद सिनेमाघरों में फिल्म को देखने कोई नहीं आया।
ऐसा ही कुछ हुआ उनकी फिल्म 'दस नंबरी' के साथ भी। फिल्म इमरजेंसी के दौरान ही साल 1976 में रिलीज हुई। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने फिल्म को बैन कर दिया। फिल्म की रिलीज के लिए मनोज कुमार कोर्ट पहुंच गए। उन्होंने सरकार के खिलाफ केस लड़ा और जीत उनकी ही हुई।
सरकार ने दिया फिल्म का ऑफर, मुंह पर किया इनकार
एक किस्सा वो भी है जब मनोज कुमार ने 'इमरजेंसी' के समर्थन में फिल्म बनाने के ऑफर को ठुकरा दिया था। बताया जाता है कि एक दिन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारी की ओर से मनोज कुमार को फोन गया। उन्होंने मनोज कुमार से ऐसी डॉक्यूमेंट्री बनाने को कहा जो इमरजेंसी के समर्थन में थी। उन्हें बताया गया कि इसकी कहानी अमृता प्रीतम ने लिखी है। मनोज को स्क्रिप्ट भी दी गई थी, लेकिन उन्होंने फोन पर ही ऐसा करने के साफ इनकार कर दिया।
लाल बहादुर शास्त्री की सलाह पर बनाई 'उपकार'
मनोज कुमार की 'उपकार' फिल्म से जुड़ा भी एक किस्सा है। यह फिल्म उन्होंने पूर्व PM लाल बहादुर शास्त्री के कहने पर बनाई थीं। भारत और पाकिस्तान के बीच साल 1965 में हुए युद्ध के दौरान लाल बहादुर शास्त्री ने 'जय जवान जय किसान' का नारा दिया था। युद्ध में भारत की जीत हुई। इसके बाद एक दिन लाल बहादुर शास्त्री और मनोज कुमार की दिल्ली में मुलाकात हुई। तब लाल बहादुर शास्त्री ने उन्हें जवान और किसान पर फिल्म बनाने की सलाह दी।
1965 को दौर था जब भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध चल रहा था। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री थे। युद्ध जैसे ही खत्म हुआ तब लाल बहादुर शास्त्री ने मनोज कुमार से मुलाकात की और इस युद्ध के दौरान हुई परेशानियों पर एक फिल्म बनाने की बात कही। ये बात मनोज के मन में घर कर गई। फिर उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री के नारा "जय जवान, जय किसान" से प्रेरित होकर फिल्म "उपकार" लिखी। बताया जाता है कि मनोज कुमार ने तब दिल्ली से मुंबई के लिए रवाना हुए और इस 24 घंटे के सफर में ही उन्होंने फिल्म की कहानी लिख दी थी और इसका नाम ‘उपकार’ रखा।
Published By : Ruchi Mehra
पब्लिश्ड 4 April 2025 at 11:03 IST