'कई हिंदू बेटियां जैसे ही इस्लामिस्ट के संपर्क में आती हीं वो इतनी कट्टर हो जाती हैं, हां मुझे संघी...', कंगना रनौत ने ऐसा क्यों कहा?
बॉलीवुड एक्ट्रेस और मंडी से बीजेपी सांसद कंगना रनौत अपने एक इंस्टाग्राम वीडियो को लेकर फिर से सुर्खियों में हैं। कंगना ने धर्म, पहचान और विचारधारा के मुद्दे पर समाज के दोहरे रवैये पर कड़ा प्रहार किया है।
- मनोरंजन समाचार
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बॉलीवुड अभिनेत्री और मंडी से बीजेपी सांसद कंगना रनौत एक बार फिर अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा करते हुए पहचान, धर्म और अपनी विचारधारा को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने खुद को एक ‘जागृत और अनुशासित हिंदू’ बनाने की इच्छा व्यक्त की और आलोचकों से सीधा सवाल किया कि अगर बाकी सभी को अपनी आस्था चुनने का अधिकार है, तो हिंदू महिलाओं के लिए यह रास्ता क्यों बंद किया जाता है?
फिल्म इंडस्ट्री और विचारधारा पर कंगना का नजरिया
कंगना ने संसद जाने से पहले रिकॉर्ड किए इस वीडियो में फिल्म जगत के अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री में कई हिंदू बहन-बेटियां शुरुआत में धर्म और राजनीति को लेकर बेहद न्यूट्रल होती हैं। लेकिन जब वे किसी इस्लामिस्ट के संपर्क में आती हैं, तो उनकी सोच तुरंत बदल जाती है और वे एक कट्टरपंथी नजरिया अपना लेती हैं। संविधान सभी को यह आजादी देता है, इसलिए उन्हें इस बदलाव से कोई आपत्ति नहीं है।
'मुझे संघी बनना है और अनुशासित हिंदू के रूप में बदलना है'
कंगना ने समाज के दोहरे रवैये पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा, 'मुझसे पूछा जाता है कि तुम कब से संघी बन गईं? हां, मैं पहले एक मॉडरेट हिंदू थी, लेकिन अब मैं संघी बनना चाहती हूं। मैं बीजेपी और आरएसएस की विचारधारा से प्रेरित होकर एक स्पष्ट और अनुशासित हिंदू बनना चाहती हूं।'
उन्होंने आगे कहा कि जब कोई हिंदू महिला अपनी पहचान में बदलाव लाना चाहती है, तो समाज के ठेकेदार उनके 10 साल पुराने इतिहास, उनकी पुरानी जीवनशैली और पुरानी पार्टियों के मुद्दे उठाकर उनसे अग्निपरीक्षा मांगने लगते हैं। कंगना ने कहा कि 'अगर दूसरे लोग अपनी पसंद की विचारधारा अपना सकते हैं, तो मैं क्यों कन्वर्ट नहीं हो सकती? मेरे लिए जागृत हिंदू बनने का रास्ता क्यों बंद है?'
दोगली सोच के खिलाफ लड़ाई
कंगना ने कहा कि वह अब खुद को डिफेंड नहीं करेंगी, क्योंकि अगर वह चुप रहीं तो कई अन्य हिंदू बेटियां यह कदम उठाने से डरेंगी। उन्होंने इस सोच को 'दोगली मानसिकता' करार देते हुए कहा कि हमारी बेटियों को भी यह पूर्ण आजादी होनी चाहिए कि वे खुद को एक अनुशासित और परिभाषित हिंदू के रूप में ढाल सकें।
Published By : Aarya Pandey
पब्लिश्ड 3 August 2026 at 18:56 IST