Bengal Election: बंगाल में दूसरे चरण की वोटिंग के बीच हिंसा और बवाल, क्या दोबारा डाले जाएंगे वोट? CEO बोले- अगर ये रिपोर्ट सच हुई तो...

पश्चिम बंगाल चुनाव के दूसरे चरण में डायमंड हार्बर में BJP ने EVM के साथ छेड़छाड़ का गंभीर आरोपी लगाया है। इसके बाद CEO की तरफ से भी इसपर तुरंत प्रतिक्रिया दी गई। जानें पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इसपर क्या कुछ कहा? पढ़ें पूरी खबर।

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EVM पर टेप लगाने के आरोपों पर CEO का बड़ा ऐलान | Image: EC

West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण की वोटिंग के बीच राज्य के डायमंड हार्बर निर्वाचन क्षेत्र से बड़ी खबर आई है। फाल्टा इलाके में पोलिंग बूथों पर EVM के साथ कथित छेड़छाड़ को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने गंभीर आरोप लगाए हैं। विवाद बढ़ता देख पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज कुमार अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि अगर गड़बड़ी की शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो संबंधित बूथों पर दोबारा मतदान (Repoll) कराया जाएगा।

क्या है 'डायमंड हार्बर मॉडल' का विवाद? 

BJP के पश्चिम बंगाल सह-प्रभारी अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि फाल्टा के कई मतदान केंद्रों पर EVM मशीन में BJP के चुनाव चिह्न वाले बटन को टेप से ढका गया है। मालवीय ने इसे 'डायमंड हार्बर मॉडल' करार दिया और दावा किया कि यह वही तरीका है जिसका इस्तेमाल टीएमसी अपने गढ़ को सुरक्षित रखने के लिए करती है। उन्होंने कुछ बूथों के नाम साझा करते हुए तुरंत रीपोलिंग की मांग की है।

CEO ने क्या कहा?

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए पश्चिम बंगाल के CEO मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा, 'EVM पर किसी भी तरह की टेपिंग या छेड़छाड़ की रिपोर्ट आने पर उसका मौके पर सत्यापन (Field Verification) किया जाएगा। अगर यह आरोप सच साबित होते हैं, तो उन विशिष्ट बूथों पर दोबारा वोटिंग की जाएगी।' चुनाव आयोग स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है और जिला अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है।

दूसरे चरण में जारी है मतदान 

राज्य की 142 सीटों पर दूसरे चरण का मतदान शांतिपूर्ण ढंग से जारी है। दोपहर 3 बजे तक 78.68 प्रतिशत वोटिंग हुई है। वहीं, हुगली और हावड़ा जैसे जिलों में मतदाताओं में उत्साह देखा गया। साथ ही डायमंड हार्बर के घटनाक्रम ने राजनीतिक पारा गरमा दिया है।

यह चुनाव तृणमूल कांग्रेस (TMC) और BJP के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है, जिसमें कोलकाता और दक्षिण बंगाल की सीटों पर सबकी नजरें टिकी हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। 4 मई को होने वाली मतगणना के साथ ही यह साफ हो जाएगा कि बंगाल की सत्ता किसके हाथ में जाएगी। 

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Published By : Nidhi Mudgill

पब्लिश्ड 29 April 2026 at 17:01 IST