अपडेटेड 11 March 2026 at 00:06 IST

चीन समेत पड़ोसी देशों के लिए FDI नियमों में बदलाव, 10% से कम हिस्सेदारी पर बिना मंजूरी कर सकेंगे निवेश, केंद्र सरकार का बड़ा फैसला

FDI Rules Change: केंद्र सरकार ने चीन समेत भारत के साथ बॉर्डर शेयर करने वाले यानी पड़ोसी देशों से आने वाले फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट के नियमों में ढील दी है। जिससे निवेशक 10% से कम हिस्सेदारी पर बिना मंजूरी निवेश कर सकेंगे।

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FDI Rules Change | Image: Shutterstock/ Representational

FDI Rules Change: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों के लिए FDI नियमों में बड़ा बदलाव किया है। इसके अंतर्गत चीन समेत भारत के साथ बॉर्डर शेयर करने वाले पड़ोसी देशों के निवेशकों को 10 प्रतिशत तक की नॉन-कंट्रोलिंग हिस्सेदारी को ऑटोमैटिक रूट के तहत आसानी से अनुमति मिल जाएगी।

FDI के नियमों में ढील

PM मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार यानी 10 मार्च को हुई कैबिनेट मीटिंग में प्रेस नोट 3 यानी FDI पॉलिसी के नियमों में बदलाव को मंजूरी दी गई। इसके तहत उन निवेश प्रस्तावों को सेक्टोरल शर्तों के साथ ऑटोमैटिक मंजूरी मिल जाएगी, जिनमें पड़ोसी देश के निवेशक की हिस्सेदारी 10% से कम हो और उसका कंपनी पर कोई कंट्रोल न हो। इसके साथ ही, स्ट्रैटेजिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश के लिए 60 दिनों की समय सीमा तय कर दी गई है।

क्या होता है FDI?

दरअसल, जब कोई विदेशी कंपनी या व्यक्ति भारत में किसी कंपनी, फैक्ट्री, बिजनेस या प्रोजेक्ट में सीधे पैसा लगाती है, तो उसे FDI कहते हैं। इसके पुराने नियमों के अनुसार पड़ोसी देशों से हर निवेश के लिए सरकारी मंजूरी जरूरी थी। इसका अप्रूवल मिलने में महीनों का समय लगता था, कोई डेडलाइन नहीं थी। साथ ही 'बेनिफिशियल ओनर' की परिभाषा को लेकर अस्पष्टता थी।

लेकिन, अब नए नियमों के अनुसार, 10% से कम 'बेनिफिशियल ओनरशिप' पर निवेश को ऑटोमैटिक अनुमति मिल गई है। इसमें मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए 60 दिन की समय सीमा तय कर दी गई है। 

स्टार्टअप्स को फायदा 

बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार के इस फैसले का असर भारतीय स्टार्टप्स और डीप टेक सेक्टर पर पड़ेगा। सरकार का कहना है, इन बदलावों का उद्देश्य ग्लोबल फंड्स से निवेश हासिल करना और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देना है।

प्रेस नोट 3 की वजह से ग्लोबल PE और VC फंड्स को निवेश में परेशानी हो रही थी, क्योंकि उनमें पड़ोसी देशों के निवेशकों का छोटा हिस्सा भी शामिल होता था। सरकार ने निवेश नियमों में पारदर्शिता के लिए 'बेनिफिशियल ओनर' की परिभाषा PMLA रूल्स, 2005 के समान कर दी है। जिससे अब 10% की सीमा तय होने से फंड का फ्लो आसान हो जाएगा। 

सरकार ने साफ किया है कि इन बदलावों से विशेष रूप से तीन सेक्टरों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। जिसमें इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स बनाने वाली कंपनियों को विदेशी निवेश और तकनीक मिल सकेगी। भारी मशीनरी और इंडस्ट्रियल इक्विपमेंट के प्रोडक्शन में तेजी आएगी। साथ ही रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।

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Published By : Sagar Singh

पब्लिश्ड 11 March 2026 at 00:03 IST